Delhi News: देश की राजधानी दिल्ली में एक महिला वकील पर उनके पति द्वारा किए गए जानलेवा हमले ने उच्चतम न्यायालय को झकझोर दिया है। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने सोमवार को इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया कि मामले की जांच किसी वरिष्ठ महिला अधिकारी को सौंपी जाए। सुप्रीम कोर्ट ने पीड़िता को इलाज के लिए मना करने वाले तीन अस्पतालों की भूमिका की जांच के भी सख्त आदेश दिए हैं।
महिला अधिकारी करेंगी जांच, गायब बच्चों की तलाश तेज
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जांच अधिकारी अधिमानतः एसीपी या डीसीपी रैंक की एक महिला अधिकारी होनी चाहिए। सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि पीड़िता के ससुराल वाले उसके दो नाबालिग बच्चों को लेकर फरार हैं। पीठ ने पुलिस को तत्काल दोनों बच्चों का पता लगाने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। जांच अधिकारी को इस पूरे मामले की विस्तृत स्थिति रिपोर्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत करनी होगी ताकि न्याय प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके।
इलाज से इनकार करने वाले अस्पतालों पर गिरेगी गाज
इस मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू यह रहा कि गंभीर रूप से घायल पीड़िता को तीन अस्पतालों ने भर्ती करने से मना कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रशासनिक लापरवाही को बेहद गंभीरता से लिया है। पीठ ने जांच अधिकारी को निर्देशित किया है कि वे उन अस्पतालों के खिलाफ भी जांच करें जिन्होंने संकट के समय पीड़िता को चिकित्सा सहायता देने से इनकार किया। शीर्ष अदालत ने इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप के लिए प्राप्त एक पत्र के बाद स्वतः संज्ञान लिया।
आरोपी पति गिरफ्तार, पुलिस ने कोर्ट को दी पूरी जानकारी
दिल्ली पुलिस की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने पीठ को महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मामले की प्राथमिकी पहले ही दर्ज की जा चुकी है। पुलिस ने आरोपी पति मनोज कुमार को 25-26 अप्रैल की दरमियानी रात को खजूरी खास इलाके से दबोच लिया है। सोनिया विहार निवासी आरोपी अब पुलिस की गिरफ्त में है। पुलिस अब फरार ससुराल वालों और गायब बच्चों का सुराग लगाने के लिए कई ठिकानों पर छापेमारी कर रही है।
न्याय और सुरक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख
उच्चतम न्यायालय का यह कड़ा रुख दर्शाता है कि वकीलों की सुरक्षा और महिलाओं के खिलाफ हिंसा पर कोई समझौता नहीं होगा। पीठ ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए हर पहलू पर बारीकी से नजर रखने का फैसला किया है। जांच अधिकारी को न केवल आरोपी के खिलाफ सबूत जुटाने होंगे, बल्कि बच्चों की बरामदगी और अस्पतालों की जवाबदेही भी तय करनी होगी। इस मामले ने दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोलकर रख दी है।
