Chandigarh News: कभी बुढ़ापे की निशानी मानी जाने वाली दिल की बीमारियां अब युवाओं की जान ले रही हैं। यह ‘साइलेंट किलर’ बिना किसी चेतावनी के सीधे हमला करता है। इस गंभीर खतरे को समझने के लिए चंडीगढ़ के पीजीआईएमईआर (PGIMER) में देश के चोटी के डॉक्टर जुटे। वर्ल्ड एनसीडी फेडरेशन, पीजीआई और ‘नाइन’ ने मिलकर एक बड़ा वैज्ञानिक महामंथन किया। विशेषज्ञों ने दिल की बीमारियों के नए और अनजान खतरों से पर्दा उठाया। उन्होंने बताया कि कैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) हृदय रोगों के इलाज में एक बड़ी क्रांति ला रहा है।
आखिर युवाओं के दिलों को कौन कर रहा है कमजोर?
पीजीआई के डीन डॉ. आरके राथो ने युवाओं में बढ़ते हार्ट अटैक पर गहरी चिंता जताई। पहले लोग मानते थे कि केवल तंबाकू और शराब ही दिल के सबसे बड़े दुश्मन हैं। लेकिन आज के दौर में ‘शारीरिक निष्क्रियता’ सबसे बड़ा खतरा बन गई है। लगातार एक जगह बैठे रहना और जंक फूड खाना युवाओं के दिलों को बीमार कर रहा है। प्रो. संदीप ग्रोवर ने बताया कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी भी दिल पर भारी पड़ रही है। मानसिक तनाव और गलत खान-पान युवाओं के हृदय को समय से पहले ही कमजोर बना रहा है।
हृदय रोगों के सटीक इलाज में ‘AI’ की शानदार एंट्री
अब तक हार्ट अटैक का खतरा ईसीजी या साधारण ब्लड टेस्ट से ही नापा जाता था। लेकिन प्रो. मनफूल सिंह के मुताबिक इन पुराने तरीकों की अपनी कई सीमाएं हैं। अब चिकित्सा विज्ञान पूरी तरह से एडवांस्ड इमेजिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर निर्भर हो रहा है। एआई की मदद से बीमारी का बिल्कुल सटीक पूर्वानुमान लगाया जा सकता है। एआई लाखों मरीजों के डेटा का एक साथ विश्लेषण कर सकता है। इससे यह पता चल जाता है कि भविष्य में किसे हार्ट अटैक का खतरा है। डॉक्टर समय रहते सही इलाज शुरू कर सकेंगे।
दिल की बीमारियों के नए और बिल्कुल अनजान खतरे
इस मेडिकल कांफ्रेंस में कुछ ऐसे जोखिमों का खुलासा हुआ जिनसे आम लोग अनजान हैं। प्रो. पंकज मल्होत्रा ने ‘चिप’ (CHIP) नामक एक नए खतरे के बारे में विस्तार से बताया। यह बढ़ती उम्र और शरीर की कोशिकाओं में होने वाला एक बदलाव है। यह कारक हृदय रोगों का जोखिम कई गुना तक बढ़ा देता है। इसके अलावा डॉ. पूजा सिक्का ने महिलाओं के स्वास्थ्य पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हृदय रोग सिर्फ पुरुषों की बीमारी नहीं है। महिलाओं को भी गर्भावस्था से पहले और बाद में विशेष देखभाल की जरूरत होती है।
इलाज के नए मॉडल और ट्रांस-फैट का खात्मा है जरूरी
आईजीएमसी शिमला के प्रो. संजीव असोत्रा ने बचपन के बुखार से होने वाली दिल की बीमारियों पर चिंता जताई। इसके लिए एक नई वैक्सीन पर तेजी से काम चल रहा है। डॉ. चिन्मय ने मरीजों के लिए केवल अस्पताल के भरोसे रहने को नाकाफी बताया। उन्होंने घर-आधारित देखभाल के नए मॉडल की वकालत की। विशेषज्ञों ने माना कि बाजार से ‘ट्रांस-फैट’ को पूरी तरह खत्म करना होगा। डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड्स को मजबूत करना होगा ताकि सरकार सटीक नीतियां बना सके।
