तमिलनाडु: परिसीमन विधेयक को स्टालिन ने ‘काला कानून’ बताकर जलाया, बोले- हिंदी विरोध के बाद दिल्ली को फिर घुटने टेकने पड़ेंगे

Tamil Nadu News: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने परिसीमन विधेयक की एक प्रति जलाकर उसे ‘काला कानून’ करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह विधेयक तमिल लोगों को उनकी अपनी भूमि में शरणार्थी बनाने का प्रयास है। उन्होंने हिंदी विरोधी आंदोलन का हवाला देते हुए कहा कि दिल्ली को फिर से झुकना पड़ेगा।

नामक्कल में विधेयक की प्रति जलाई, काले झंडे दिखाकर विरोध

स्टालिन ने बृहस्पतिवार को नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान यह कार्रवाई की। उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई परिसीमन विधेयक की प्रति जलाई और काले झंडे दिखाए। इस दौरान काले वस्त्र पहने अन्य लोगों ने भी नारे लगाए। स्टालिन ने ‘पोराडावोम, वेलवोम ओन्द्रगा’ (आइए हम मिलकर संघर्ष करें, साथ मिलकर जीतें) का नारा लगाया। उन्होंने कहा कि विरोध की यह ज्वाला पूरे तमिलनाडु में फैलेगी।

स्टालिन ने किया हिंदी विरोधी आंदोलन का हवाला, दिल्ली को दी चेतावनी

मुख्यमंत्री ने 1960 के दशक में हुए हिंदी विरोधी आंदोलन को याद किया। उन्होंने कहा कि तब तमिलनाडु से उठी प्रतिरोध की आग ने दिल्ली को झुलसा दिया था। वह तभी शांत हुई जब दिल्ली झुकने को मजबूर हुई। स्टालिन ने चेतावनी दी, “आज मैंने इस काले कानून की प्रति जलाकर और काला झंडा दिखाकर उस आग को फिर से प्रज्वलित कर दिया है। यह आग अब पूरी द्रविड़ भूमि में फैलेगी और भाजपा के अहंकार को घुटने टेकने पर मजबूर कर देगी।”

बुधवार को राज्य भर में काले झंडे दिखाने का आह्वान किया था

स्टालिन ने बुधवार को ही राज्य भर में काले झंडे दिखाकर प्रदर्शन का आह्वान किया था। उन्होंने दावा किया था कि भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का यह कदम तमिलनाडु के हितों को नुकसान पहुंचाएगा। उनका कहना है कि परिसीमन से दक्षिणी राज्यों का प्रतिनिधित्व कम होगा, जबकि उत्तरी राज्यों को अनुचित लाभ मिलेगा। यह मुद्दा राज्य में गहरी राजनीतिक हलचल पैदा कर रहा है।

DMK सांसद कनिमोझी ने संसद में दिया नोटिस, रुख साफ किया

वहीं, द्रमुक सांसद कनिमोझी ने संसद में परिसीमन विधेयक के खिलाफ नोटिस दिया और अपना रुख स्पष्ट कर दिया। उन्होंने कहा कि यह विधेयक तमिलनाडु के अधिकारों के खिलाफ है। संसद के विशेष सत्र के दौरान यह विधेयक पेश किए जाने की उम्मीद है। विपक्षी दल इसे लेकर एकजुट होते दिख रहे हैं। द्रमुक ने पहले ही संकेत दिया था कि वह इस विधेयक का हर संभव मंच पर विरोध करेगी। कनिमोझी का नोटिस इसी रणनीति का हिस्सा है।

परिसीमन विधेयक को लेकर दक्षिणी राज्यों में व्यापक असंतोष

स्टालिन का यह विरोध केवल तमिलनाडु तक सीमित नहीं है। कर्नाटक, केरल, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश जैसे अन्य दक्षिणी राज्यों ने भी परिसीमन विधेयक पर आपत्ति जताई है। उनका तर्क है कि 2011 की जनगणना के आधार पर सीटों का बंटवारा उनके साथ अन्याय करेगा। स्टालिन का विधेयक जलाना इस असंतोष की चरम अभिव्यक्ति है। केंद्र सरकार अब तक इन आपत्तियों को खारिज करती रही है, लेकिन यह घटनाक्रम बताता है कि मामला और गर्मा सकता है।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
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