राजस्थान: जल जीवन मिशन घोटाले में पूर्व मंत्री महेश जोशी गिरफ्तार, फसल बीमा योजना में भी खुला भ्रष्टाचार

Rajasthan News: राजस्थान भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने गुरुवार को एक बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व जलदाय मंत्री महेश जोशी को गिरफ्तार कर लिया है। जोशी पर पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान जल जीवन मिशन (जेजेएम) में 960 करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले का आरोप है। एसीबी की एसआईटी ने उन्हें जयपुर स्थित उनके आवास से हिरासत में लिया। इसके बाद उन्हें विशेष न्यायालय में पेश किया गया, जहां से अदालत ने उन्हें 11 मई तक के लिए रिमांड पर भेज दिया है।

ठेकों की शर्तों में बदलाव कर पहुंचाया गया लाभ

एसीबी के महानिदेशक गोविंद गुप्ता के अनुसार, जांच में आए तथ्यों ने घोटाले में महेश जोशी की अहम भूमिका की पुष्टि की है। भ्रष्टाचार के इस खेल में 50 करोड़ रुपये से अधिक के ठेकों में कार्यस्थल निरीक्षण जैसी अनिवार्य शर्तों को जोड़ा गया, ताकि 20 हजार करोड़ रुपये के कुल ठेकों में हेरफेर किया जा सके। आरोप है कि खास ठेकेदारों को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए निविदा की शर्तों में मनमाने ढंग से बदलाव किए गए और फर्जी प्रमाण-पत्रों के आधार पर काम सौंपे गए।

मामले में अब तक कई उच्चाधिकारी गिरफ्तार

इस हाई-प्रोफाइल घोटाले में केवल नेता ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक अधिकारी भी रडार पर हैं। एसीबी इस मामले में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल सहित कुल 11 आरोपियों को पहले ही सलाखों के पीछे भेज चुकी है। विभाग के तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य सचिव रहे अग्रवाल पर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप हैं। फिलहाल, इस मामले में तीन अन्य आरोपी अभी भी फरार हैं, जिनकी तलाश में पुलिस और एसीबी की टीमें विभिन्न ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं।

मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने पकड़ा बीमा फर्जीवाड़ा

एक अन्य महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, राजस्थान के कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में हो रहे बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश किया है। हनुमानगढ़ जिले के स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की एक शाखा में औचक निरीक्षण के दौरान मंत्री ने पाया कि उत्तर प्रदेश और बिहार के फर्जी किसानों के नाम पर करीब नौ करोड़ रुपये हड़पने की साजिश रची गई थी। फर्जी नामों से क्लेम पास कर दिया गया था, जबकि उन लोगों के पास जमीन का कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था।

साजिश में बैंक और कृषि विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत

प्रारंभिक जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि 162 फर्जी किसानों के नाम पर क्लेम स्वीकृत किए गए थे। इनमें से 66 फर्जी खाते खोलकर उन्हें कर्जदार दिखाया गया था ताकि सरकारी राशि का गबन किया जा सके। कृषि मंत्री मीणा ने बैंक कर्मियों और कृषि विभाग के अधिकारियों से जब जमीन के दस्तावेज मांगे, तो वे कोई जवाब नहीं दे सके। मंत्री ने इसे लूट का अनोखा तरीका बताते हुए मामले की विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं।

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