India News: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती (14 अप्रैल) के अवसर पर एक पत्र जारी कर ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को आगे बढ़ाने की जोरदार वकालत की। उन्होंने कहा कि भारत के विकास के लिए कानून बनाने में महिलाओं की भागीदारी अनिवार्य है। पीएम ने संविधान निर्माता को श्रद्धांजलि देते हुए संवैधानिक मूल्यों को राष्ट्र के लिए मार्गदर्शक शक्ति बताया।
संसद में 16 अप्रैल से होगी नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर चर्चा
प्रधानमंत्री ने अपने पत्र में लिखा कि 16 अप्रैल से संसद फिर से बैठेगी। इस सत्र में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ से जुड़े एक महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधन पर चर्चा होगी और उम्मीद है कि इसे पारित किया जाएगा। पीएम ने कहा कि इस अधिनियम को लेकर देशभर में जबरदस्त उत्साह है। महिलाएं ‘विकसित भारत’ के निर्माण में योगदान देने का मजबूत अवसर मिलने पर खुशी जाहिर कर रही हैं। उन्होंने कहा कि यह संशोधन दशकों से लंबित संकल्प को साकार करेगा।
हर क्षेत्र में महिलाएं दे रही हैं अपना योगदान
पीएम मोदी ने पत्र में लिखा कि राष्ट्रीय जीवन के हर पहलू में नारी शक्ति अपनी छाप छोड़ रही है। स्टार्टअप से लेकर विज्ञान और नवाचार तक, महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। शिक्षा, साहित्य, कला, संगीत, सिनेमा और विरासत के क्षेत्रों में भी महिलाएं आगे बढ़ रही हैं। खासतौर पर खेलों में भारतीय महिला एथलीट रिकॉर्ड तोड़ रही हैं, पदक जीत रही हैं और पुरानी सोच को चुनौती दे रही हैं। उनकी सफलताएं युवा लड़कियों को प्रेरित कर रही हैं।
लखपति दीदियां बन रही आत्मनिर्भरता की मिसाल
प्रधानमंत्री ने ग्रामीण महिलाओं के योगदान का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पूरे भारत में जमीनी स्तर पर अनगिनत स्वयं सहायता समूह और ‘लखपति दीदियां’ यह दिखा रही हैं कि आत्मनिर्भरता कैसे हासिल की जा सकती है। ये महिलाएं दूसरी महिलाओं को सशक्त बनाने का काम भी कर रही हैं। पीएम ने कहा कि जब महिलाएं इतने सारे क्षेत्रों में बेहतरीन प्रदर्शन कर रही हैं, तो यह बिल्कुल सही है कि विधायी निकायों में भी उनकी भागीदारी बढ़ाई जाए। यह एक ऐसा विषय है, जिस पर पिछले कई दशकों से व्यापक सहमति रही है।
महिलाओं के अधिकारों के लिए अनिश्चित काल तक इंतजार नहीं
पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि विकास यात्रा को गति देने के लिए महिलाओं की सक्रिय भागीदारी अनिवार्य है। इसी सिद्धांत के चलते 2023 में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पारित किया गया था। उन्होंने कहा कि भारत की बेटियों से उस चीज के लिए अनिश्चित काल तक इंतजार नहीं कहा जा सकता, जो उनका अधिकार है। जब विधायिकाओं में महिलाओं की आवाज मजबूत होती है, तो लोकतंत्र की आवाज भी मजबूत हो जाती है। पीएम ने विश्वास जताया कि आगामी संसद सत्र में यह ऐतिहासिक संशोधन पारित होगा।
