Noida News: उत्तर प्रदेश सरकार ने नोएडा में हाल ही में हुई हिंसा पर बड़ा खुलासा किया है। गिरफ्तार किए गए 66 लोगों में से 45 मजदूर नहीं हैं। सरकार का कहना है कि वेतन वृद्धि की आड़ में औद्योगिक क्षेत्र को नुकसान पहुंचाने की सुनियोजित साजिश रची गई थी। फिलहाल स्थिति पूरी तरह काबू में है और सभी फैक्ट्रियों में कामकाज सामान्य हो गया है।
हिंसा और आगजनी में बाहरी तत्वों की अहम भूमिका, 11 गैर-मजदूर गिरफ्तार
सोमवार को मजदूरों के वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर हुआ विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया था। इस दौरान औद्योगिक क्षेत्रों में कई वाहनों में आग लगाई गई और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया। सरकार ने बताया कि आगजनी में शामिल 17 लोगों में से 11 मजदूर नहीं हैं। प्रशासन ने कहा कि कुछ राजनीतिक समूहों और सोशल मीडिया के जरिए अफवाह फैलाने वालों की भूमिका सामने आई है।
मजदूर आंदोलन की आड़ में अराजकता फैलाने की साजिश नाकाम
यूपी सरकार के अनुसार, प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मजदूर आंदोलन की आड़ में अराजकता फैलाने की ‘सुनियोजित साजिश’ को नाकाम कर दिया। गिरफ्तार किए गए 66 लोगों में से 34 ऐसे हैं जो मजदूर नहीं हैं। इन पर भीड़ में शामिल होकर माहौल खराब करने का आरोप है। 4 लोगों को साजिश रचने के जुर्म में गिरफ्तार किया गया है, जिनके किसी बड़े नेटवर्क से जुड़े होने का शक है। जारी बयान में कहा गया कि यह नोएडा की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने की एक बड़ी कोशिश थी।
विभिन्न राज्यों की महिलाएं भी हिंसा में शामिल, उपद्रवियों पर कड़ी कार्रवाई जारी
सरकार ने बताया कि अलग-अलग राज्यों की कुछ महिलाएं भी विरोध प्रदर्शन में सक्रिय रूप से शामिल पाई गई हैं। ये महिलाएं हिंसक गतिविधियों में जुटे लोगों की मदद कर रही थीं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रशासन ने हालात पर काबू पाने के लिए फौरन कदम उठाए। वेतन बढ़ोतरी की घोषणा के बाद मजदूरों और फैक्टरी मालिकों ने सहयोग किया, जिससे औद्योगिक गतिविधियां पटरी पर लौट आईं। राज्य सरकार ने साफ किया है कि कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों पर कोई नरमी नहीं बरती जाएगी और हिंसा में शामिल उपद्रवियों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई होगी। सभी फैक्ट्रियों में कामकाज सामान्य रूप से चल रहा है।
