New Delhi News: केंद्र सरकार ने देश के प्रमुख थिंक टैंक नीति आयोग में दो नई नियुक्तियां करके उसे और अधिक शक्तिशाली बना दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रसिद्ध शिक्षाविद डॉ. जोराम अनिया और विशेषज्ञ डॉ. आर बालासुब्रमण्यम को आयोग का पूर्णकालिक सदस्य नियुक्त किया है। कैबिनेट सचिवालय द्वारा जारी अधिसूचना के मुताबिक इन विशेषज्ञों की नियुक्ति तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है। अब आयोग में पूर्णकालिक सदस्यों की कुल संख्या सात हो गई है।
पूर्वोत्तर की ‘हिंदी स्कॉलर’ बनीं नीति आयोग की सदस्य
अरुणाचल प्रदेश की डॉ. जोराम अनिया की नियुक्ति पूर्वोत्तर भारत के लिए एक गौरवशाली क्षण है। वह न्यिशी समुदाय की पहली महिला हैं जिन्होंने हिंदी भाषा में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की है। डॉ. अनिया के पास शिक्षण और सार्वजनिक नीति अनुसंधान का अठारह वर्षों से अधिक का अनुभव है। वह वर्तमान में अरुणाचल प्रदेश निजी शैक्षिक नियामक आयोग की सदस्य के रूप में कार्यरत हैं। उनकी नियुक्ति से राष्ट्रीय नीति निर्माण में पूर्वोत्तर की आवाज बुलंद होगी।
हार्वर्ड से पढ़े डॉ. बालासुब्रमण्यम भी टीम में शामिल
डॉ. आर बालासुब्रमण्यम सार्वजनिक नीति के क्षेत्र में एक विश्वविख्यात नाम और अनुभवी विकास कार्यकर्ता हैं। उन्होंने हार्वर्ड विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की है और ‘स्वामी विवेकानंद यूथ मूवमेंट’ जैसे प्रतिष्ठित संगठन की स्थापना की है। वह ‘ग्रासरोट्स रिसर्च एंड एडवोकेसी मूवमेंट’ के जरिए जमीनी स्तर पर बड़े बदलाव ला चुके हैं। उनकी विशेषज्ञता का लाभ सरकार को शासन सुधार और क्षमता निर्माण में मिलेगा। वह ‘इंडिक लीडरशिप’ पर कई महत्वपूर्ण पुस्तकें भी लिख चुके हैं।
पुनर्गठन के बाद नीति आयोग की नई टीम
नीति आयोग के पुनर्गठन की प्रक्रिया अप्रैल 2024 में शुरू की गई थी। अब अशोक कुमार लाहिड़ी उपाध्यक्ष के रूप में टीम का नेतृत्व कर रहे हैं। आयोग के अन्य प्रमुख सदस्यों की सूची इस प्रकार है:
- के. वी. राजू: देश के जाने-माने अर्थशास्त्री।
- एम. श्रीनिवास: दिल्ली एम्स (AIIMS) के वर्तमान निदेशक।
- अभय करंदीकर: विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव।
- गोबर्धन दास: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त वैज्ञानिक।
- राजीव गौबा: भारत के पूर्व कैबिनेट सचिव।
भविष्य की योजनाओं पर दिखेगा व्यापक असर
नीति आयोग में इन विविध क्षेत्रों के विशेषज्ञों के शामिल होने से सरकारी योजनाओं में नयापन आएगा। डॉ. अनिया स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों की विशेषज्ञ हैं, जबकि डॉ. बालासुब्रमण्यम जमीनी स्तर की चुनौतियों को समझते हैं। इन दोनों के अनुभव से स्वास्थ्य, शिक्षा और सामुदायिक सशक्तिकरण के क्षेत्र में क्रांतिकारी नीतियां बनेंगी। सरकार का लक्ष्य इन नियुक्तियों के माध्यम से विकसित भारत के संकल्प को और अधिक गति प्रदान करना है। अब यह थिंक टैंक और अधिक प्रभावी ढंग से कार्य करेगा।


