Delhi News: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के एनडीएमसी और कैंट इलाकों में मकानों के सूचीकरण का काम शुरू हो गया है। इस सरकारी अभियान के तहत कर्मचारी घर-घर जाकर लोगों से अहम जानकारियां जुटा रहे हैं। हालांकि, इस दौरान लोगों के मन में कई तरह की शंकाएं देखने को मिल रही हैं। साइबर ठगी के डर और निजता की चिंता के कारण कई नागरिक जानकारी देने से हिचकिचा रहे हैं। इसके बावजूद अधिकारी लोगों को समझाकर भरोसे में ले रहे हैं।
चाणक्यपुरी में घर-घर पहुंचीं महिला शिक्षिकाएं
एनडीएमसी स्कूल की शिक्षिकाएं ज्योति और किरन चाणक्यपुरी के बापू धाम सोसायटी पहुंचीं। गले में पहचान पत्र और हाथों में मार्कर लिए उन्होंने दस्तक दी। घर से कमलेश नामक महिला बाहर आईं। शिक्षिकाओं ने उन्हें मकानों के सूचीकरण के बारे में बताया। उन्होंने मोबाइल के जरिए तैंतीस अहम सवाल पूछे। इनमें परिवार के मुखिया, घर की बनावट, शौचालय का प्रकार और पकाने वाले ईंधन की जानकारी शामिल थी। कमलेश ने केवल कुछ सवालों का जवाब दिया। प्रक्रिया में पंद्रह मिनट लगे।
निजता और साइबर ठगी के डर से सहमे हुए हैं कई लोग
सूचीकरण के दौरान कई लोग निजी जानकारी देने से बचते दिखे। एक अन्य घर में महिला ने शौचालय और खाने की जानकारी साझा करने से इनकार कर दिया। उसने सुरक्षा का हवाला दिया। स्थिति को संभालते हुए शिक्षिकाओं ने अपना आधिकारिक कार्ड दिखाया। उन्होंने महिला को कार्ड की फोटो खींचने को कहा ताकि भरोसा कायम हो सके। इसके बाद ही वह महिला जानकारी देने को राजी हुई। साइबर ठगी के कारण नागरिक फोन नंबर देने में झिझक रहे हैं।
उच्च पदों पर बैठे अधिकारियों से लेना पड़ रहा विशेष समय
मकानों के सूचीकरण से जुड़े अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि लगभग नब्बे प्रतिशत लोग आसानी से पूरा सहयोग दे रहे हैं। वहीं दस प्रतिशत लोग ऐसे हैं जो विभागों में ऊंचे पदों पर तैनात हैं। इन अधिकारियों के घर जाने के लिए पहले से बात करके विशेष समय लेना पड़ता है। ऐसे घरों का सूचीकरण करने के लिए टीमें अक्सर रविवार के दिन उनके आवास पर जाती हैं। यह पूरी प्रक्रिया बेहद सुरक्षित और गोपनीय है।
सूचीकरण अभियान के दौरान पूछे जा रहे हैं ये अहम सवाल
सरकारी नियमों के अनुसार एनडीएमसी और कैंट क्षेत्र में यह महत्वपूर्ण अभियान चलाया जा रहा है। सूचीकरण के तहत मौके पर मौजूद कर्मचारियों द्वारा नागरिकों से कुल तैंतीस अहम प्रश्न पूछे जाते हैं। नागरिकों की सुविधा के लिए इनमें से कुछ प्रमुख सवाल नीचे दिए गए हैं।
- परिवार के मुख्य सदस्य का नाम क्या है?
- घर की छत और फर्श किस सामग्री से बने हैं?
- खाना पकाने के लिए मुख्य ईंधन क्या है?
- क्या घर में इंटरनेट की सुविधा है?
अधिकारी फोन पर बात करके दूर कर रहे हैं लोगों की शंकाएं
जब कुछ लोग अपनी पहचान या फोन नंबर साझा करने में डरते हैं, तो मौके पर मौजूद टीम स्थिति को संभालती है। वे तुरंत अपने प्रभारी अधिकारी से फोन पर संपर्क करते हैं। अधिकारी नागरिकों से बात करके उन्हें पूरा भरोसा दिलाते हैं। वे स्पष्ट करते हैं कि दी गई सभी जानकारी निजी और सुरक्षित रखी जाएगी। इस आश्वासन के बाद लोग आसानी से अभियान में अपना सहयोग देकर सरकार की मदद कर रहे हैं।
