New Delhi News: मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 रद्द होने के बाद देशभर में छात्रों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के खिलाफ छात्र सड़कों पर उतरकर जमकर नारेबाजी कर रहे हैं। इसी बीच चर्चित शिक्षक खान सर ने सिस्टम पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने परीक्षा रद्द होने को लाखों युवाओं के भविष्य और आत्मविश्वास के साथ खिलवाड़ बताया है। खान सर ने पूरी चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही तय करने की पुरजोर मांग की है।
खान सर ने साल 2024 की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि बार-बार ऐसी गड़बड़ियां होना दुर्भाग्यपूर्ण है। उनके मुताबिक, पिछली बार की सीबीआई जांच का कोई ठोस नतीजा नहीं निकला था। इसी कारण दोषियों के हौसले बुलंद हो गए और उन्होंने दोबारा ऐसा दुस्साहस किया। खान सर का मानना है कि इस तरह की लापरवाही से मेहनती बच्चों का मनोबल पूरी तरह टूट जाता है। उन्होंने व्यवस्था की खामियों को उजागर करते हुए एजेंसी की कार्यप्रणाली को आड़े हाथों लिया।
“नेवर ट्रस्टेबल एजेंसी” है NTA: खान सर का बड़ा हमला
सिस्टम पर तंज कसते हुए खान सर ने एक बेहद हास्यास्पद लेकिन कड़वी तुलना की है। उन्होंने कहा कि बाजार में मिलने वाला दस रुपये का बच्चों का डायपर तक लीक नहीं होता, लेकिन इनका पेपर लीक हो जाता है। उन्होंने NTA के नाम का अर्थ ‘नेवर ट्रस्टेबल एजेंसी’ बताते हुए कहा कि इसकी विश्वसनीयता अब शून्य हो चुकी है। खान सर ने हैरानी जताई कि गड़बड़ी का पता सरकारी एजेंसियों के बजाय सबसे पहले छात्रों को ही चला।
खान सर ने मौजूदा जांच प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि सीबीआई की जांच की गति इतनी धीमी है कि जब तक नतीजा आएगा, तब तक छात्र अपनी डॉक्टरी की पढ़ाई पूरी कर लेंगे। उन्होंने मांग की है कि सुप्रीम कोर्ट के किसी रिटायर्ड जज को इस पूरे मामले का ऑब्जर्वर नियुक्त करना चाहिए। साथ ही एक तय समय सीमा के भीतर जिम्मेदार अधिकारियों को ऐसी कड़ी सजा मिलनी चाहिए जो नजीर बन सके।
प्रधानमंत्री मोदी और सुप्रीम कोर्ट से लगाई गुहार
खान सर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस मामले में व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप करने की भावुक अपील की है। उन्होंने कहा कि अगर अब ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में अन्य राज्यों से भी पेपर लीक की खबरें आएंगी। खान सर ने पुराने उदाहरण देते हुए बताया कि पेपर लीक के बाद जब दोबारा परीक्षा होती है, तो एजेंसी जानबूझकर पेपर बहुत कठिन बना देती है। इससे छात्रों को दोहरी मार झेलनी पड़ती है और उनका करियर दांव पर लग जाता है।
अंत में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से भी आगे आने और स्वतः संज्ञान लेने का अनुरोध किया है। खान सर का कहना है कि राजस्थान और केरल जैसे राज्यों से आने वाली गड़बड़ियों की खबरें पूरे देश के शिक्षा तंत्र को शर्मसार कर रही हैं। सरकार को छात्रों के हितों की रक्षा के लिए अब बिना किसी देरी के सख्त कानून बनाने चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर व्यवस्था नहीं सुधरी, तो देश के होनहार युवाओं का परीक्षा प्रणाली से भरोसा हमेशा के लिए उठ जाएगा।


