अब्राहम समझौता बना ‘सुरक्षा कवच’: इजरायल की ‘लेजर पावर’ ने यूएई में ऐसे मचाई तबाही

Middle East News: ईरान और खाड़ी देशों के बीच बढ़ते तनाव के बीच इजरायल और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) का रक्षा गठबंधन एक नए और ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया है। फाइनेंशियल टाइम्स की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, इजरायल ने यूएई को न केवल अपना प्रसिद्ध ‘आयरन डोम’ दिया है, बल्कि अपनी सबसे गुप्त और अत्याधुनिक लेजर रक्षा प्रणाली ‘आयरन बीम’ भी तैनात की है। यह अत्याधुनिक लेजर सिस्टम ईरानी मिसाइलों और ड्रोन्स को हवा में ही भाप बनाकर उड़ाने की क्षमता रखता है, जो खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा में गेम-चेंजर साबित हो रहा है।

‘आयरन बीम’: प्रकाश की गति से दुश्मनों का सफाया

इजरायल की ‘आयरन बीम’ प्रणाली रक्षा तकनीक के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम मानी जा रही है। यह प्रणाली उच्च-शक्ति वाले लेजर बीम का उपयोग करती है, जो दुश्मन के ड्रोन्स और कम दूरी की मिसाइलों को पलक झपकते ही नष्ट कर देती है। इजरायल ने पहली बार इसका सफल युद्धक उपयोग लेबनान से होने वाले हिजबुल्लाह के हमलों के खिलाफ किया था। यूएई में इसकी तैनाती दर्शाती है कि इजरायल अपने सबसे करीबी अरब सहयोगियों की सुरक्षा के लिए अपनी सबसे उन्नत और गोपनीय तकनीक साझा करने को तैयार है।

‘स्पेक्ट्रो’ सिस्टम से शाहिद ड्रोन्स पर पैनी नजर

लेजर सिस्टम के साथ-साथ इजरायल ने यूएई को ‘स्पेक्ट्रो’ नामक एक बेहद उन्नत निगरानी प्रणाली भी प्रदान की है। यह सिस्टम खास तौर पर ईरान के घातक ‘शाहिद ड्रोन्स’ का पता लगाने के लिए डिजाइन किया गया है। स्पेक्ट्रो प्रणाली 20 किलोमीटर की दूरी से ही आने वाले खतरों को भांप लेती है, जिससे रक्षा प्रणालियों को जवाबी कार्रवाई के लिए पर्याप्त समय मिल जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक, यूएई को दी गई ये प्रणालियां इतनी आधुनिक हैं कि इनमें से कई अभी इजरायली सेना में भी पूरी तरह शामिल नहीं की गई थीं।

500 मिसाइलें और 2,000 ड्रोन्स का भीषण हमला

ईरान और यूएई के बीच का संघर्ष हाल के महीनों में बेहद हिंसक रहा है। आंकड़ों के अनुसार, ईरान ने यूएई के ऊर्जा ठिकानों और बुनियादी ढांचे पर 500 से अधिक बैलिस्टिक मिसाइलें और लगभग 2,000 आत्मघाती ड्रोन्स दागे थे। इस भीषण हमले से निपटने के लिए इजरायल ने न केवल हथियार भेजे, बल्कि कई दर्जन विशेषज्ञ सैनिक भी यूएई की जमीन पर तैनात किए। ये सैनिक और खुफिया अधिकारी रियल-टाइम इंटेलिजेंस साझा कर रहे हैं, जिससे ईरानी हमलों की सटीकता को काफी हद तक कम किया जा सका है।

अब्राहम समझौते का असर: दुश्मनी से रक्षा कवच तक

वर्ष 2020 में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता में हुए ‘अब्राहम समझौते’ ने मध्य पूर्व की राजनीति को पूरी तरह बदल दिया है। इस समझौते से पहले इजरायल और यूएई के बीच कोई औपचारिक संबंध नहीं थे, लेकिन आज वे एक-दूसरे के सबसे बड़े सैन्य साझेदार बन चुके हैं। यह रक्षा सहयोग इस बात का सबूत है कि साझा खतरों ने पुराने दुश्मनों को अब एक मजबूत सामरिक धुरी में बदल दिया है। यूएई की धरती पर इजरायली सैनिकों की मौजूदगी इस गठबंधन की गहराई को बयां करती है।

युद्ध के बीच प्रोटोटाइप हथियारों का परीक्षण

दिलचस्प बात यह है कि यूएई को भेजी गई कई रक्षा प्रणालियां अभी ‘प्रोटोटाइप’ यानी परीक्षण के दौर में ही थीं। युद्ध की तेज रफ्तार और ईरानी खतरों की गंभीरता को देखते हुए इजरायल ने इन तकनीकों को सीधे युद्ध क्षेत्र में उतारने का साहसी फैसला लिया। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे न केवल यूएई की रक्षा हुई है, बल्कि इजरायल को भी अपनी तकनीकों को वास्तविक युद्ध परिस्थितियों में परखने का मौका मिला है। यह सहयोग भविष्य में एक औपचारिक ‘मिसाइल डिफेंस पैक्ट’ की नींव रख सकता है।

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