Himachal News: हिमाचल प्रदेश के चम्बा जिले में स्कूली बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए डल्हौजी पुलिस ने कड़ा अभियान छेड़ा है। डीएसपी मयंक शर्मा के नेतृत्व में ट्रैफिक पुलिस की टीम ने बनीखेत क्षेत्र में निजी स्कूल वाहनों की सघन जांच की। इस विशेष अभियान का मुख्य उद्देश्य नशे के खिलाफ कार्रवाई, ‘ड्रिंक एंड ड्राइव’ को रोकना और वाहनों के दस्तावेजों का सत्यापन करना था। पुलिस प्रशासन ने बच्चों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने वाले संचालकों को सख्त चेतावनी दी है।
दस्तावेजों में खामी मिलने पर बस को किया गया इंपाउंड
जांच अभियान के दौरान पुलिस टीम ने स्कूल बसों के रजिस्ट्रेशन, इंश्योरेंस, फिटनेस सर्टिफिकेट और चालक के ड्राइविंग लाइसेंस की बारीकी से पड़ताल की। इस दौरान एक निजी स्कूल की बस में गंभीर कमियां पाई गईं। आवश्यक कानूनी दस्तावेज उपलब्ध न होने के कारण पुलिस ने मौके पर ही कार्रवाई करते हुए वाहन को कब्जे में ले लिया। डीएसपी मयंक शर्मा ने दो-टूक कहा कि बिना वैध कागजात के स्कूल वाहन चलाना बच्चों की जान जोखिम में डालने वाला अपराध है।
डीएसपी मयंक शर्मा की स्कूल प्रबंधकों को चेतावनी
डीएसपी मयंक शर्मा ने स्पष्ट किया कि डल्हौजी और बनीखेत क्षेत्रों में भविष्य में भी इस प्रकार की औचक जांच जारी रहेगी। उन्होंने स्कूल संचालकों को निर्देश दिए कि वे केवल उन्हीं वाहनों को सड़क पर उतारें जो सुरक्षा मानकों पर खरे उतरते हों। पुलिस के अनुसार, नियमों का उल्लंघन करने वाले संचालकों के विरुद्ध सख्त कानूनी मुकदमा दर्ज किया जाएगा। प्रशासन इस मामले में जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रहा है ताकि बच्चों का सफर पूरी तरह सुरक्षित रहे।
अभिभावकों से सतर्क रहने की विशेष अपील
पुलिस प्रशासन ने इस मुहिम में अभिभावकों की भागीदारी को भी जरूरी बताया है। डीएसपी ने अपील की है कि माता-पिता अपने बच्चों की सुरक्षा के प्रति जागरूक रहें। वे नियमित रूप से यह जांचें कि उनका बच्चा जिस वाहन से स्कूल जा रहा है, उसके पास सभी वैध सरकारी दस्तावेज मौजूद हैं या नहीं। बच्चों की सुरक्षा केवल पुलिस की नहीं, बल्कि समाज की भी सामूहिक जिम्मेदारी है। पुलिस अब नियमित अंतराल पर स्कूलों के बाहर चेकिंग अभियान चलाएगी।
नशे के खिलाफ भी जारी रहेगा सख्त अभियान
पुलिस का यह अभियान केवल दस्तावेजों तक सीमित नहीं है। बनीखेत और डल्हौजी में संदिग्ध चालकों के ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट भी किए जा रहे हैं। डीएसपी ने कहा कि स्कूली बसों के ड्राइवरों का आचरण और उनकी शारीरिक स्थिति बच्चों की सुरक्षा के लिए सबसे महत्वपूर्ण है। पुलिस विभाग ने स्पष्ट किया कि यदि कोई चालक नशे की हालत में पाया जाता है, तो उसका लाइसेंस तुरंत रद्द किया जाएगा। इसके साथ ही संबंधित स्कूल प्रबंधन पर भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।


