India News: भारत के संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर की 135वीं जयंती देशभर में धूमधाम से मनाई जा रही है। उनका जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश के महू में हुआ था। बाबा साहेब ने अपना पूरा जीवन समाज से जातिवाद, भेदभाव और असमानता को मिटाने में लगा दिया। उन्होंने शिक्षा और न्याय व्यवस्था को एक नई दिशा प्रदान की। उनके ओजस्वी विचार आज भी करोड़ों लोगों को प्रेरणा देते हैं। शिक्षा ही इंसान को सही मायनों में सशक्त बनाती है।
शिक्षा और समानता पर बाबा साहेब के अनमोल विचार
डॉ. आंबेडकर हमेशा सामाजिक न्याय और समानता के प्रबल समर्थक रहे। उनका स्पष्ट मानना था कि हर इंसान को खुद को शिक्षित करना चाहिए। शिक्षा ही समाज की प्रगति की सबसे मजबूत रीढ़ है। उन्होंने कहा था कि वह मूर्तियों में नहीं, बल्कि किताबों में बसते हैं। इसलिए उन्हें पूजने की नहीं, बल्कि उनके विचारों को पढ़ने की जरूरत है। ये अनमोल विचार आज भी हमें ज्ञान और शिक्षा के असली महत्व की याद दिलाते हैं। शिक्षा से ही समाज बदलता है। इस साल 14 अप्रैल के दिन कार्यक्रमों में इन 10 विचारों को पढ़ सकते हैं-
- मुझे वह धर्म पसंद है जो स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व सिखाता है।’
- ‘तुम्हारे पैरों में जूते भले ना हों, हाथों में किताब जरूर होनी चाहिए।’
- ‘जीवन लंबा होने के बजाय महान होना चाहिए।’
- ‘लोकतंत्र केवल सरकार का एक रूप नहीं है, यह मुख्य रूप से संयुक्त संचारित अनुभव का एक तरीका है।’
- ‘मैं उस धर्म को नहीं मानता जो मनुष्य को मनुष्य से अलग करता हो।’
- ‘शिक्षा महान समानता लाने वाली है।’
- ‘तुम किताबों के सामने झुक जाओ, ये तुम्हारे सामने दुनिया झुका देंगी।’
- ‘नारी को शिक्षित करो, वो समाज को संवार देगी।’
- ‘जो लोग अपने इतिहास को भूल जाते हैं, वे कभी नया इतिहास नहीं बना सकते।’
- ‘बंदूक से ज्यादा विचार घातक होता हैं। बंदूक देना आसान है, लेकिन बुद्धि देना कठिन।’
महिला सशक्तिकरण और समाज पर गहरा प्रभाव
बाबा साहेब ने महिलाओं की शिक्षा पर बहुत जोर दिया था। उनका ऐतिहासिक कथन है कि शिक्षा सामाजिक और आर्थिक विकास की असली कुंजी है। अगर आप एक आदमी को पढ़ाते हैं, तो सिर्फ एक व्यक्ति शिक्षित होता है। लेकिन अगर आप एक महिला को शिक्षित करते हैं, तो पूरा परिवार शिक्षित हो जाता है। उनके ये विचार आज भी हर छात्र और युवा के लिए मार्गदर्शक का काम करते हैं। हमें उनके इस महान संदेश को जीवन में उतारना चाहिए। इस बार आंबकेडकर जयंती पर भाषण में उनके ये विचार भी पढ़ सकते हैं-
- ‘शिक्षा स्वतंत्रता के सुनहरे दरवाजे को खोलने की कुंजी है।’
- ‘शिक्षा सामाजिक बुराइयों से लड़ने का एक शक्तिशाली हथियार है।’
- ‘जाति को खत्म करने का एकमात्र तरीका शिक्षा है।’
- ‘गरीबी उन्मूलन का एकमात्र उपाय शिक्षा है।’
- ‘किसी राष्ट्र का भविष्य उसके युवाओं की शिक्षा पर निर्भर करता है।’
आधुनिक भारत के निर्माण में आंबेडकर का योगदान
आधुनिक भारत का निर्माण बाबा साहेब के विचारों के बिना अधूरा है। उन्होंने वंचितों और शोषितों को उनके अधिकार दिलाकर एक मजबूत राष्ट्र की नींव रखी। आज देश के कई बड़े संस्थान उनके दिखाए रास्ते पर चल रहे हैं। शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को पूरी दुनिया नमन करती है। जयंती के इस खास मौके पर स्कूलों और कॉलेजों में उनके विचारों पर चर्चा होती है। हमें उनके सपनों का समतामूलक भारत बनाने के लिए लगातार काम करना होगा।
