रामपुर स्लॉटर हाउस में बड़ा खुलासा: टीबी संक्रमित निकला 6 पशुओं का मीट, आपकी थाली तक पहुंचने वाला था ‘जहर’

Himachal News: हिमाचल प्रदेश के रामपुर में प्रशासन की सतर्कता से एक बड़ा स्वास्थ्य संकट टल गया। स्लॉटर हाउस में औचक निरीक्षण के दौरान नियमों की धज्जियां उड़ती मिलीं। पशुपालन विभाग ने जांच में 6 पशुओं के मांस को इंसानी इस्तेमाल के लिए असुरक्षित पाया है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह मांस क्षय रोग (टीबी) से संक्रमित था। इसे खाने से 70 फीसदी तक बीमारियां फैलने का खतरा था। प्रशासन ने तुरंत इस पूरे मीट को नष्ट करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं।

नियमों को ताक पर रखकर किया जा रहा था पशु वध

ज्योरी स्थित उप-मंडलीय पशु चिकित्सालय के अधिकारियों ने जब रामपुर स्लॉटर हाउस का औचक दौरा किया, तो वहां हालात बेहद खराब मिले। ठेकेदार पशु अधिकारी की गैर-मौजूदगी में ही वध की प्रक्रिया पूरी कर रहे थे। विभाग ने निरीक्षण के लिए सुबह 8:30 बजे का समय तय किया था। इसके बावजूद ठेकेदारों ने जांच से पहले ही कई पशुओं को काट दिया। यह सीधे तौर पर ‘स्लॉटर हाउस नियम 2001’ का उल्लंघन है। विभाग ने इस लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाया है।

फेफड़ों और लिवर में मिलीं टीबी की संदिग्ध गांठें

निरीक्षण के दौरान सबसे खतरनाक तथ्य पशुओं के अंगों की जांच में सामने आया। वध किए गए 6 पशुओं के लिवर और फेफड़ों में संदिग्ध गांठें पाई गईं। पशु चिकित्सकों के अनुसार, ये क्षय रोग (टीबी) के प्राथमिक और स्पष्ट लक्षण हैं। विभाग ने इस मांस को तुरंत रिजेक्ट कर दिया। पशुपालन विभाग अब इसकी विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर रहा है। यह रिपोर्ट जल्द ही एसडीएम रामपुर और नगर परिषद को सौंपी जाएगी ताकि दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो सके।

मीट विक्रेताओं ने जताया विभागीय कार्रवाई पर रोष

प्रशासनिक कार्रवाई के बीच मीट विक्रेताओं ने अपनी नाराजगी जाहिर की है। विक्रेताओं ने मांग उठाई कि शरीर के केवल उसी हिस्से को हटाया जाए जहां बीमारी के लक्षण दिख रहे हैं। हालांकि, वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारियों ने इस मांग को सिरे से खारिज कर दिया। सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए पूरे शरीर का मांस नष्ट किया गया है। अब भविष्य में एंटी-मॉर्टम और पोस्ट-मॉर्टम जांच सुबह 7 बजे से अनिवार्य कर दी गई है।

बाहरी राज्यों से लाए गए बकरों में अधिक संक्रमण

चिकित्सा विशेषज्ञों ने बताया कि रामपुर क्षेत्र में बिकने वाले अधिकांश बकरे राजस्थान से लाए जा रहे हैं। इन बाहरी पशुओं में संक्रमण और बीमारियों का खतरा स्थानीय बकरों के मुकाबले बहुत ज्यादा मिल रहा है। विभाग ने लोगों को केवल स्थानीय मीट खरीदने की सलाह दी है। इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग ने हिदायत दी है कि मांस को हमेशा 100 डिग्री सेल्सियस से ऊपर के तापमान पर अच्छी तरह पकाकर ही खाएं। इससे संक्रमण का खतरा काफी कम हो जाता है।

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