Mumbai News: बॉलीवुड के सुनहरे दौर की सबसे चमकदार सितारा नरगिस दत्त की जिंदगी किसी फिल्मी पटकथा से कम रोमांचक नहीं रही। 1950 के दशक में वह भारतीय सिनेमा का सबसे बड़ा चेहरा थीं। वह न केवल पद्मश्री पाने वाली पहली अभिनेत्री बनीं, बल्कि उनकी फिल्म ‘मदर इंडिया’ ऑस्कर के लिए नामांकित होने वाली पहली भारतीय फिल्म थी। महज 6 साल की उम्र से अपना फिल्मी सफर शुरू करने वाली नरगिस 20 साल की होते-होते स्वतंत्र भारत की पहचान बन चुकी थीं।
मदर इंडिया के सेट पर शुरू हुई प्रेम कहानी
नरगिस और सुनील दत्त की प्रेम कहानी एक भीषण हादसे के साथ शुरू हुई थी। साल 1957 में फिल्म ‘मदर इंडिया’ की शूटिंग के दौरान सेट पर भयानक आग लग गई थी। नरगिस लपटों के बीच फंस गई थीं। उस समय उनके सह-कलाकार सुनील दत्त ने अपनी जान की परवाह किए बिना आग में छलांग लगा दी और उन्हें सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इस रेस्क्यू के दौरान सुनील दत्त बुरी तरह जल गए थे, जिसके बाद नरगिस ने उनकी खूब सेवा की।
एक साल तक गुप्त रखी गई थी शादी
सुनील दत्त की बहादुरी और सादगी ने नरगिस का दिल जीत लिया था। दोनों ने 11 मार्च 1958 को आर्य समाज रीति-रिवाज से गुपचुप तरीके से शादी कर ली। हैरान करने वाली बात यह है कि इस शादी को करीब एक साल तक दुनिया से छिपाकर रखा गया। इसका मुख्य कारण फिल्म ‘मदर इंडिया’ थी, जिसमें दोनों ने मां और बेटे की भूमिका निभाई थी। उन्हें डर था कि शादी की खबर फिल्म की सफलता और दर्शकों की भावनाओं को प्रभावित कर सकती है।
संजय दत्त के डेब्यू से पहले दुखद अंत
शादी के बाद नरगिस ने अपने चमकते करियर को अलविदा कह दिया और परिवार को प्राथमिकता दी। वह राज्यसभा सदस्य भी बनीं, लेकिन 1980 में उन्हें पैंक्रियाटिक कैंसर होने का पता चला। नरगिस चाहती थीं कि वह अपने बेटे संजय दत्त की पहली फिल्म ‘रॉकी’ के प्रीमियर में शामिल हों। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। फिल्म की रिलीज से महज चार दिन पहले उनका निधन हो गया। प्रीमियर के दौरान सुनील दत्त ने उनके सम्मान में एक सीट खाली रखी थी।


