Himachal News: हिमाचल प्रदेश में एक बड़े प्रशासनिक घोटाले की गूंज है। पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी ने सोलन की एसडीएम पूनम बंसल के खिलाफ विजिलेंस जांच की सिफारिश की है। डीजीपी ने उपायुक्त सोलन को एक पत्र भेजा है। इसमें प्रारंभिक जांच के आधार पर पद के भारी दुरुपयोग और संदिग्ध वित्तीय लेनदेन के गंभीर आरोप हैं। पुलिस मुख्यालय के इस सख्त कदम से पूरे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। सरकार अब इस मामले में जल्द ही कड़ा एक्शन लेगी।
चेस्टर हिल मामले की जांच पर उठे बड़े सवाल
अधिकारी पूनम बंसल ने ही सोलन के बहुचर्चित चेस्टर हिल मामले की शुरुआती जांच की थी। डीजीपी के पत्र में एसडीएम के विरुद्ध सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की मांग उठी है। पूरे मामले को तुरंत एंटी करप्शन ब्यूरो को सौंपने की मजबूत सिफारिश की गई है। पुलिस थाना सदर सोलन में सत्ताईस अप्रैल को दर्ज एक शिकायत के बाद यह कार्रवाई हुई है। पुलिस टीम ने जमीन की रजिस्ट्री, बैंक लेनदेन और फील्ड सत्यापन के दौरान गंभीर अनियमितताएं पकड़ी हैं।
पति के खाते से लाखों के लेनदेन का भंडाफोड़
जांच में सबसे अहम बिंदु वित्तीय लेनदेन से जुड़ा सामने आया है। पत्र में उल्लेख है कि एसडीएम के पति सुनील कुमार बंसल ने एक महिला के खाते में साढ़े चालीस लाख रुपये ट्रांसफर किए। इसके ठीक बाद जमीन की रजिस्ट्री करवा ली गई। हैरानी की बात यह है कि संपत्ति किसी तीसरे व्यक्ति के नाम पर खरीदी गई। इस पूरे घटनाक्रम ने बेनामी संपत्ति की आशंका पैदा कर दी है। पुलिस असली स्रोत की जांच कर रही है।
काले धन को सफेद करने के खेल का अंदेशा
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि अन्य जमीन सौदों में भी भारी राशि का हेरफेर हुआ है। अलग-अलग बैंक खातों के माध्यम से एक ही दिन में बड़ी रकम ट्रांसफर की गई। इस तरह के संदिग्ध लेनदेन को लेयरिंग और रूटिंग जैसी अवैध प्रक्रियाओं से सीधा जोड़कर देखा जा रहा है। आमतौर पर धन के वास्तविक स्रोत को छिपाने के लिए भ्रष्ट लोग ऐसी तरकीब अपनाते हैं। यह सौदे तब हुए जब मामले कोर्ट में लंबित थे।
नियमों की धज्जियां, भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत शिकंजा
डीजीपी के कड़े पत्र में साफ कहा गया है कि सरकारी सेवकों के संपत्ति खरीद नियमों का खुला उल्लंघन हुआ है। अधिकारी पर अपने कार्यक्षेत्र में संपत्ति खरीदने पर लगे सख्त प्रतिबंधों को दरकिनार करने की आशंका है। इस संगीन मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम उन्नीस सौ अठासी के तहत कड़ी कार्रवाई हो सकती है। इसके अलावा बेनामी संपत्ति लेनदेन निषेध अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता के अंतर्गत मुकदमा दर्ज होने की पूरी संभावना है। जांच एजेंसियां सतर्क हैं।


