शिमला नगर निगम के डिप्टी कंट्रोलर की मौत में नया मोड़, देर रात पुलिस को मिला अहम सुराग

Himachal News: शिमला नगर निगम के डिप्टी कंट्रोलर रामेश्वर शर्मा की मौत के मामले में पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। देर रात उनके घर की तलाशी के दौरान एक सुसाइड नोट बरामद हुआ है। शुरुआती जांच में पता चला है कि इस नोट में मानसिक तनाव का जिक्र किया गया है। पुलिस ने इस अहम सुराग को कब्जे में लेकर फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है। यह दर्दनाक घटना पूरे राज्य में चर्चा का विषय है।

कॉल डिटेल से खुलेगा मौत का राज

सुसाइड नोट में रामेश्वर शर्मा ने सीधे तौर पर किसी अधिकारी पर कोई आरोप नहीं लगाया है। उन्होंने सिर्फ अपने मानसिक तनाव का हवाला दिया है। पुलिस हर पहलू से इस गंभीर मामले की जांच कर रही है। अब उनके मोबाइल फोन की कॉल डिटेल निकाली जा रही है। जांच टीम यह जानने का पूरा प्रयास कर रही है कि घटना वाले दिन उनकी आखिरी बातचीत किससे हुई थी।

अस्पताल पहुंचने से पहले ही गई जान

पुलिस कंट्रोल रूम को शुक्रवार को सूचना मिली थी कि एक व्यक्ति को गंभीर हालत में आईजीएमसी अस्पताल लाया गया है। अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने शर्मा को मृत घोषित कर दिया था। पैंतालीस वर्षीय रामेश्वर शर्मा शिमला के मेहली इलाके में रहते थे। पुलिस की प्रारंभिक जांच के अनुसार, घटना वाले दिन वह सामान्य रूप से अपने कार्यालय गए थे। लेकिन वह अचानक तय समय से काफी पहले घर लौट आए थे।

पत्नी ने फंदे से लटकता हुआ देखा

तय समय से पहले घर लौटने के बाद उनकी पत्नी ने उन्हें कमरे में फंदे से लटका हुआ पाया। इसके तुरंत बाद उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया था। शिमला के एसएसपी गौरव सिंह ने सुसाइड नोट मिलने की आधिकारिक पुष्टि की है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि फिलहाल भारतीय न्याय सुरक्षा संहिता की धारा एक सौ चौरानवे के तहत कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

हिमाचल प्रदेश में अधिकारियों की संदिग्ध मौतें

रामेश्वर शर्मा की अचानक हुई मौत के बाद हिमाचल प्रदेश में वरिष्ठ अधिकारियों की संदिग्ध मौतों को लेकर नई बहस छिड़ गई है। लोगों को अब पिछले साल हुई एक और बड़ी घटना याद आ रही है। हिमाचल पावर कॉरपोरेशन के चीफ इंजीनियर विमल नेगी की संदिग्ध मौत भी काफी सुर्ख़ियों में रही थी। इन लगातार हो रही घटनाओं ने कार्यप्रणाली और मानसिक दबाव पर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

विमल नेगी केस से जुड़ रहे हैं तार

मार्च दो हजार पच्चीस में चीफ इंजीनियर विमल नेगी अचानक अपने दफ्तर से लापता हो गए थे। कुछ समय बाद उनका शव बिलासपुर जिले की गोविंद सागर झील से बरामद किया गया था। उस हाई प्रोफाइल मामले में यह आरोप लगे थे कि विभागीय प्रताड़ना के कारण ही उन्होंने आत्महत्या का कदम उठाया था। पुलिस ने उकसाने का केस दर्ज किया था और बाद में जांच सीबीआई को सौंपी गई थी।

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