डिजिटल अरेस्ट और CBI का फर्जी डर: रामनगर के प्रोफेसर ने सूझबूझ से ठगों को सिखाया सबक, आप भी रहें सावधान

Uttarakhand News: तकनीकी क्रांति के इस दौर में साइबर अपराधी अब लोगों को लूटने के लिए मनोवैज्ञानिक दबाव और डर का सहारा ले रहे हैं। हाल ही में रामनगर के एक सेवानिवृत्त प्रोफेसर ने अपनी जागरूकता और सूझबूझ से साइबर ठगों की एक बड़ी साजिश को नाकाम कर दिया। ठगों ने उन्हें गंभीर कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर जाल में फंसाने की कोशिश की थी, लेकिन प्रोफेसर ने घबराने के बजाय तथ्यों की जांच की और सुरक्षित रहे।

धमकी भरे ईमेल से डराने की कोशिश

रामनगर के मंगलार रोड निवासी और बरेली लॉ कॉलेज से सेवानिवृत्त प्रोफेसर प्रदीप कुमार को एक ईमेल मिला। इस ईमेल में दावा किया गया था कि इसे दिल्ली स्थित सीबीआई (CBI) कार्यालय से भेजा गया है। ठगों ने प्रोफेसर पर अश्लील वेबसाइट देखने और टैक्स चोरी जैसे बेहद गंभीर आरोप लगाए थे। ईमेल में डराने के लिए कानूनी कार्रवाई और तत्काल गिरफ्तारी का हवाला दिया गया था ताकि पीड़ित घबराकर पैसे दे दे।

रॉ और संदिग्ध गतिविधियों का फर्जी दावा

प्रोफेसर को भेजे गए मेल में ठगों ने लिखा था कि ‘रिसर्च एंड एनालिसिस विंग’ (RAW) की साइबर यूनिट ने उनके आईपी एड्रेस पर संदिग्ध गतिविधियां पकड़ी हैं। इसमें चाइल्ड पोर्नोग्राफी जैसे संगीन जुर्म का जिक्र करते हुए कहा गया कि अदालत ने जांच के आदेश दिए हैं। ठगों ने उन्हें जवाब देने के लिए मात्र 24 घंटे की मोहलत दी थी, जो कि पीड़ितों को सोचने का समय न देने की एक पुरानी चाल है।

जागरूकता ने बचाई जीवन भर की पूंजी

प्रोफेसर प्रदीप कुमार के अनुसार, वे दैनिक जागरण के साइबर सुरक्षा अभियान की खबरें नियमित रूप से पढ़ते थे। इसी जागरूकता के कारण उन्होंने ईमेल देखते ही इसे ठगी का प्रयास समझ लिया। उन्होंने बताया कि उन्होंने तुरंत अपनी बेटी को ईमेल दिखाया और सीबीआई में कार्यरत अपने एक पूर्व छात्र से संपर्क किया। वास्तविकता सामने आते ही उन्होंने किसी भी तरह का भुगतान करने से मना कर दिया और पुलिस में शिकायत की।

कुमाऊं मंडल में बढ़ता साइबर अपराध का ग्राफ

कुमाऊं मंडल में साइबर अपराधियों का नेटवर्क तेजी से फैल रहा है। रुद्रपुर स्थित साइबर थाने के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 16 महीनों में 20 लाख रुपये से अधिक की ठगी के 40 मामले दर्ज किए गए हैं। शिकार होने वालों में सेवानिवृत्त कर्मचारी, शिक्षक, फौजी और बड़े व्यापारी शामिल हैं। 20 लाख से कम की ठगी का शिकार होने वालों की संख्या तो सैकड़ों में है, जो बेहद चिंताजनक स्थिति है।

पुलिस की अपील: घबराएं नहीं, शिकायत करें

साइबर थाना प्रभारी अरुण कुमार ने जनता से अपील की है कि वे ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे शब्दों से न डरें। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस कभी भी डिजिटल माध्यम से किसी को गिरफ्तार नहीं करती है। यदि किसी को भी साइबर अपराध का संदेह हो, तो उसे तुरंत निकटतम पुलिस स्टेशन जाना चाहिए। वित्तीय ठगी होने की स्थिति में तत्काल हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करना सबसे प्रभावी कदम होता है।

बचाव के लिए विशेषज्ञों की सलाह

विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी अनजान ईमेल या कॉल पर भरोसा न करें। यदि कोई खुद को पुलिस या जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर धमकाता है, तो तुरंत अपने परिवार और दोस्तों को इसकी सूचना दें। साइबर ठग अक्सर पीड़ित को अकेला पाकर डराते हैं। प्रोफेसर प्रदीप कुमार का उदाहरण यह साबित करता है कि सतर्कता और सही जानकारी ही साइबर अपराध से बचने का सबसे मजबूत हथियार है।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
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