Himachal News: हिमाचल प्रदेश की लोकप्रिय स्वास्थ्य योजना ‘हिमकेयर’ में करोड़ों के फर्जीवाड़े का मामला गरमा गया है। विजिलेंस विभाग अब साइबर विशेषज्ञों की मदद से अस्पतालों का डिजिटल कच्चा चिट्ठा खंगाल रहा है। जांच एजेंसियां अस्पतालों के बिलिंग सिस्टम और क्लेम डेटा की गहराई से फोरेंसिक जांच कर रही हैं। माना जा रहा है कि डेटा रिकवर होते ही कई रसूखदार लोगों के नाम सार्वजनिक हो सकते हैं। इस घोटाले की जड़ें पूरे प्रदेश में काफी गहराई तक फैली हुई हैं।
निजी अस्पतालों का मकड़जाल और सुनियोजित फर्जीवाड़ा
जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि प्रदेश के लगभग 60 फीसदी निजी अस्पताल इस खेल में शामिल हैं। विजिलेंस के अनुसार किन्नौर, चंबा और लाहुल-स्पीति को छोड़कर बाकी सभी जिले इस भ्रष्टाचार की चपेट में हैं। शुरुआती पड़ताल बताती है कि निजी अस्पतालों ने मिलकर सरकारी खजाने को भारी चपत लगाई है। अस्पतालों ने कागजों पर फर्जी इलाज दिखाकर सरकार से लाखों रुपये के क्लेम वसूल लिए हैं। यह पूरा मामला एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा लग रहा है।
इन चार जिलों में मिला भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा केंद्र
ऊना, कांगड़ा, मंडी और बिलासपुर जिलों के निजी अस्पताल इस महाघोटाले के मुख्य केंद्र बनकर उभरे हैं। इन जिलों के रिकॉर्ड्स की जांच में लगातार गंभीर अनियमितताएं मिल रही हैं। कई मामलों में तो मरीज कभी अस्पताल पहुंचे ही नहीं, लेकिन उनके नाम पर भारी-भरकम बिल भुगतान के लिए भेज दिए गए। कागजों पर इलाज का यह मायाजाल इतना बारीक बुना गया था कि सामान्य ऑडिट में इसे पकड़ना नामुमकिन था। अब फोरेंसिक ऑडिट से सच्चाई सामने आ रही है।
विजिलेंस का बढ़ता दायरा और कार्रवाई की तैयारी
जांच एजेंसियां अब इस नेटवर्क की हर कड़ी को जोड़ने का प्रयास कर रही हैं। संदिग्ध अस्पतालों के संचालकों और उनसे जुड़े सरकारी कर्मचारियों पर भी विजिलेंस की पैनी नजर है। डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर बहुत जल्द कई बड़ी गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है। जांच का दायरा बढ़ने से स्वास्थ्य विभाग के गलियारों में भी हड़कंप मचा हुआ है। सरकारी धन के इस दुरुपयोग को रोकने के लिए विभाग अब बिलिंग प्रणाली को पूरी तरह बदलने पर विचार कर रहा है।


