Uttarakhand News: उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित भगवान विष्णु के आठवें वैकुंठ, बद्रीनाथ धाम के कपाट गुरुवार सुबह श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। ब्रह्म मुहूर्त में ठीक 6 बजकर 15 मिनट पर वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक अनुष्ठानों के साथ मंदिर के द्वार खुले। इस पावन अवसर पर हजारों भक्तों की भीड़ उमड़ी और पूरा क्षेत्र ‘जय बद्री विशाल’ के नारों से गूंज उठा। इसके साथ ही अब उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा ने अपनी पूरी गति पकड़ ली है।
वैदिक रीति-रिवाज से संपन्न हुई द्वार खुलने की प्रक्रिया
बद्रीनाथ मंदिर के कपाट खुलने की प्रक्रिया पूरी तरह शास्त्रोक्त विधि-विधान और सदियों पुरानी परंपराओं के अनुसार संपन्न हुई। मंदिर के मुख्य पुजारी (रावल), धर्माधिकारी और अन्य वेदपाठियों ने गर्भगृह के द्वार खोलने से पहले विशेष पूजा-अर्चना की। भगवान बद्रीनाथ का अभिषेक किया गया और लोक कल्याण की कामना के साथ पहली आरती उतारी गई। कपाट खुलने के ऐतिहासिक क्षण का गवाह बनने के लिए श्रद्धालु रात से ही कड़ाके की ठंड में लंबी कतारों में डटे रहे थे।
फूलों की भव्य सजावट और सेना के बैंड की मधुर धुन
इस विशेष उत्सव के लिए पूरे मंदिर परिसर को क्विंटल फूलों से बेहद खूबसूरती के साथ सजाया गया था। गेंदे और अन्य खुशबूदार फूलों की मालाओं से मंदिर की भव्यता और भी बढ़ गई थी। इस दौरान भारतीय सेना के बैंड ने अपनी सुरीली धुनों से वातावरण को और भी भक्तिमय बना दिया। मंदिर के बाहर खड़े हजारों भक्तों की आंखों में श्रद्धा और उत्साह का संगम साफ दिखाई दे रहा था। लोग भावुक होकर प्रार्थना करते नजर आए।
चारधाम यात्रा 2026 का विधिवत शंखनाद
बद्रीनाथ धाम के द्वार खुलने के साथ ही इस वर्ष की चारधाम यात्रा अब अपने पूर्ण स्वरूप में शुरू हो गई है। गौरतलब है कि केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट पहले ही श्रद्धालुओं के लिए खोले जा चुके हैं। प्रशासन ने तीर्थयात्रियों की भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के पुख्ता इंतजाम किए हैं। देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए पंजीकरण अनिवार्य किया गया है ताकि यात्रा सुगम और सुरक्षित तरीके से संपन्न कराई जा सके।
आस्था के आगे बौनी साबित हुई हिमालय की चुनौतियां
हिमालय की अत्यधिक ऊंचाई और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद भक्तों की आस्था अटूट दिखाई दे रही है। हर साल लाखों श्रद्धालु मोक्ष की कामना लेकर इन पवित्र धामों के दर्शन करने पहुंचते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बद्रीनाथ धाम के दर्शन मात्र से मनुष्य के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और उसे मानसिक शांति मिलती है। यही कारण है कि दुर्गम रास्तों और बदलती जलवायु के बाद भी श्रद्धालुओं की संख्या में हर साल रिकॉर्ड बढ़ोतरी हो रही है।
