IIT रुड़की और USAC के बीच समझौता, अंतरिक्ष तकनीक से उत्तराखंड में आपदा प्रबंधन को मिलेगा बढ़ावा

Uttarakhand News: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रुड़की और उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (यूसैक) के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता शैक्षणिक, वैज्ञानिक और शोध गतिविधियों में सहयोग बढ़ाने के लिए किया गया है। आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. कमल किशोर पंत और यूसैक के निदेशक प्रो. दुर्गेश पंत ने इस एमओयू पर हस्ताक्षर किए। इस साझेदारी से राज्य में अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी को नई दिशा मिलेगी।

शोध और शैक्षणिक गतिविधियों को मिलेगा नया आयाम

एमओयू के तहत दोनों संस्थान कई क्षेत्रों में मिलकर काम करेंगे। इनमें वैज्ञानिक अनुसंधान और शैक्षिक गतिविधियों की जानकारियों का आदान-प्रदान शामिल है। फैकल्टी और वैज्ञानिकों का आदान-प्रदान भी होगा। यूसैक के वैज्ञानिकों और तकनीकी कर्मियों के क्षमता निर्माण पर ध्यान दिया जाएगा। संयुक्त शोध और पायलट प्रोजेक्ट भी संचालित किए जाएंगे। ये प्रोजेक्ट अंतरिक्ष अनुप्रयोग, जियोस्पेशियल तकनीक, जलवायु परिवर्तन, आपदा प्रबंधन और प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन जैसे विषयों पर केंद्रित होंगे। यह सहयोग उत्तराखंड की चुनौतियों का समाधान करने में मदद करेगा।

छात्रों को मिलेंगे इंटर्नशिप और संयुक्त शोध के अवसर

इस एमओयू के तहत आईआईटी रुड़की के छात्रों को यूसैक में इंटर्नशिप, प्रोजेक्ट वर्क और शोध प्रबंध के अवसर मिलेंगे। दोनों संस्थान एमटेक और पीएचडी छात्रों की शोध परियोजनाओं का संयुक्त पर्यवेक्षण भी कर सकेंगे। संयुक्त पर्यवेक्षण वाले छात्र अपने गाइड से चर्चा और लैब सुविधाओं के लिए दोनों परिसरों में जा सकेंगे। छात्रों का चयन योग्यता और शोध क्षेत्र के आधार पर संयुक्त रूप से किया जाएगा। यह चयन आईआईटी रुड़की के अकादमिक नियमों के अधीन होगा। इससे छात्रों को व्यावहारिक अनुभव हासिल करने का बेहतर मौका मिलेगा।

राज्य के लिए व्यावहारिक समाधान विकसित करने पर जोर

दोनों संस्थान राज्य में अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने के लिए संयुक्त कार्यशालाएं, प्रशिक्षण कार्यक्रम, सम्मेलन, हैकाथॉन और आउटरीच गतिविधियां आयोजित करेंगे। शोध परिणामों को राज्य के सरकारी विभागों और एजेंसियों के लिए व्यावहारिक उपयोग में लाने में सहायता दी जाएगी। इस अवसर पर यूसैक की वैज्ञानिक डॉ. सुषमा गैरोल और डॉ. नीलम रावत भी मौजूद रहीं। यह एमओयू उत्तराखंड में आपदा प्रबंधन और प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग के क्षेत्र में नई संभावनाएं खोलेगा। आईआईटी रुड़की की तकनीकी विशेषज्ञता और यूसैक के अंतरिक्ष अनुप्रयोग ज्ञान का यह मेल राज्य के विकास में मील का पत्थर साबित होगा।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
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