सिद्धार्थनगर में 22 घंटे बाद मौत को मात देकर लौटे दो किशोर: सेना का रेस्क्यू और एक मासूम की मौत की पूरी कहानी

Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले में एक दिल दहला देने वाला हादसा रविवार सुबह सुखद और दुखद यादों के साथ समाप्त हुआ। काशीराम कॉलोनी की 60 फीट ऊंची पानी की टंकी पर 22 घंटों तक फंसे दो किशोरों, पवन और कल्लू को सेना के सफल रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद सुरक्षित बचा लिया गया। हालांकि, इस दर्दनाक घटना में उनके एक साथी सिद्धार्थ की जान चली गई। पूरा इलाका इस समय राहत और शोक के दोहरे माहौल में डूबा हुआ है।

22 घंटे तक मौत से जंग और सेना का साहसिक रेस्क्यू

शनिवार दोपहर शुरू हुआ यह संकट रविवार सुबह करीब 10 बजे तब खत्म हुआ जब सेना के जवानों ने दोनों किशोरों को हेलीकॉप्टर की मदद से सुरक्षित नीचे उतारा। पवन और कल्लू करीब 22 घंटे तक बिना अन्न-जल के टंकी के ऊपरी हिस्से पर फंसे रहे। नीचे उतरने के बाद उन्हें प्राथमिक उपचार के लिए गोरखपुर भेजा गया। वहां से प्रशासनिक वाहन द्वारा उन्हें वापस उनके घर लाया गया, जहां उनके परिजनों ने भावुक होकर उनका स्वागत किया।

सीढ़ी टूटने से हुआ हादसा और एक मासूम की मौत

यह भीषण हादसा शनिवार दोपहर करीब 1:30 बजे हुआ जब पांच किशोर कॉलोनी के पीछे स्थित पानी की टंकी पर चढ़ गए थे। अचानक टंकी की जर्जर सीढ़ी टूट गई, जिससे 13 वर्षीय सिद्धार्थ, सनी और गोलू ऊंचाई से नीचे गिर पड़े। जमीन पर गिरने से सिद्धार्थ को गंभीर चोटें आईं और अस्पताल में डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। वहीं सनी और गोलू का इलाज अभी मेडिकल कॉलेज में चल रहा है, जहां उनकी स्थिति में सुधार है।

भावुक कर देने वाला मिलन और मां की ममता

जब पवन सुरक्षित अपने घर पहुंचा, तो वह अपनी मां मीना से लिपटकर फूट-फूटकर रोने लगा। उसने कांपती हुई आवाज में बताया कि उसे जिंदा बचने की उम्मीद बिल्कुल नहीं थी। मां ने अपने कलेजे के टुकड़े को चूमते हुए भगवान का शुक्रिया अदा किया। मोहल्ले के लोगों की आंखें भी यह मार्मिक दृश्य देखकर नम हो गईं। पूरा परिवार अब भी उस दहशत से उबर नहीं पाया है जो उन्होंने शनिवार की पूरी रात जागकर काटी थी।

एक ही परिवार के पांच किशोरों पर टूटा दुखों का पहाड़

इस हादसे का शिकार हुए सभी किशोर आपस में करीबी रिश्तेदार थे। पवन के बड़े पिता अखिलेश ने बताया कि पवन, राजमिस्त्री मिथलेश का बेटा है। मृतक सिद्धार्थ उनके सबसे छोटे भाई धर्मेंद्र का पुत्र था, जो वर्तमान में सऊदी अरब में कार्यरत हैं। यह परिवार मूल रूप से मोहाना क्षेत्र के रामपुर टोला का रहने वाला है। हादसे की सूचना पाकर पूरे खानदान में कोहराम मच गया है क्योंकि एक ओर खुशी है तो दूसरी ओर गहरी शोक की लहर।

प्रशासन और सेना की तत्परता ने बचाई दो की जान

घटना की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने तत्काल सेना और एनडीआरएफ की मदद मांगी थी। शनिवार की पूरी रात जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक मौके पर ही डटे रहे। अखिलेश ने सेना के जवानों और प्रशासनिक अधिकारियों की जमकर सराहना की है। उन्होंने कहा कि यदि सेना समय पर रेस्क्यू शुरू नहीं करती, तो शायद पवन और कल्लू को बचाना मुश्किल होता। अब स्थानीय लोग जर्जर पानी की टंकी के रखरखाव पर सवाल उठा रहे हैं।

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