Uttar Pradesh News: गाजियाबाद के गौड़ ग्रीन एन्क्लेव में बुधवार को लगी भीषण आग ने आठ परिवारों की जिंदगी भर की कमाई को राख के ढेर में बदल दिया है। आशियाना गंवा चुके इन परिवारों का दर्द अब आंसुओं के जरिए छलक रहा है। अग्निकांड के बाद अब ये लोग अपनों के घर या खाली फ्लैटों में शरण लेने को मजबूर हैं। एनडीआरएफ जैसी संस्थाओं से मदद न मिलने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं, जिससे पीड़ितों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
18 साल की मेहनत और पोते की खुशियां धुएं में गुम
फ्लैट नंबर 1043 के निवासी अशोक कुमार वर्मा के लिए यह आग किसी काल से कम नहीं थी। उन्होंने 18 साल की मेहनत के बाद अपना यह घर बसाया था। घर में पोते के मुंडन की खुशियां मनाई जा रही थीं और उज्जैन दर्शन की तैयारी थी। तभी अचानक लगी आग ने सब कुछ तहस-नहस कर दिया। परिवार ने वेंटिलेशन से घुसते धुएं और अंधेरे के बीच किसी तरह सीढ़ियों से भागकर अपनी जान बचाई। अब उनके पास सिर छिपाने के लिए अपनी छत तक नहीं बची है।
गृह प्रवेश से महज आठ दिन पहले जल गया अरमानों का घर
सबसे दुखद कहानी फ्लैट नंबर 943 की है, जहां से आग की शुरुआत हुई थी। इसके मालिक कमल पालविंदर बैंक से रिटायरमेंट के बाद अगले सप्ताह अपने नए घर में गृह प्रवेश करने वाले थे। पांच साल की मेहनत और जीवन भर की पूंजी लगाकर उन्होंने इस घर को सजाया था। आग ने न केवल उनके 70 लाख रुपये का नुकसान किया, बल्कि उनके बुढ़ापे के सपने को भी जला दिया। उनके बेटे अभिषेक अब एक सेल्समैन के तौर पर परिवार की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
मेंटेनेंस और फायर सेफ्टी पर उठे गंभीर सवाल
सोसायटी के निवासियों ने मेंटेनेंस विभाग और बिल्डिंग की बनावट पर गंभीर आरोप लगाए हैं। लोगों का कहना है कि पांच साल पहले बनाए गए पार्क और स्विमिंग पूल की दीवार के कारण फायर टेंडर बिल्डिंग तक नहीं पहुंच सके। यदि यह पार्क नहीं होता, तो दमकल विभाग की गाड़ियां समय पर आग बुझा पातीं। इसके अलावा, बिल्डिंग में खतरे का सायरन न होने की बात भी सामने आई है। सुरक्षा मानकों में इन कमियों के कारण आग ने इतना विकराल रूप धारण किया।
लाखों का नुकसान और बेघर हुए कई सरकारी कर्मचारी
फ्लैट नंबर 1243 में रहने वाले कमल अग्रवाल एक सरकारी विभाग में कार्यरत हैं और उन्होंने अपने इंटीरियर पर 20 लाख रुपये खर्च किए थे। वह ऑफिस में थे जब उन्हें घर जलने की सूचना मिली। इसी तरह सुधांशु चौधरी का भी करीब 60-70 लाख रुपये का सामान जलकर खाक हो गया है। बुधवार की रात उन्होंने अपने दोस्त के घर गुजारी, लेकिन अब वे किराए का घर तलाश रहे हैं। आग से प्रभावित लोग अब प्रशासन से आर्थिक मदद और जवाबदेही की गुहार लगा रहे हैं।


