हिमाचल के युवाओं को क्या खा रहा है अंदर ही अंदर? चौंकाने वाले सर्वे से हिल गया पूरा देश; जानें क्या बोले शांता कुमार

Himachal News: हिमाचल प्रदेश की खूबसूरत वादियों में एक भयानक सच्चाई सामने आई है। यहां की युवा पीढ़ी भयंकर मानसिक तनाव और अवसाद का सामना कर रही है। पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार ने हालिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए गहरी चिंता व्यक्त की है। पीजीआई और नेशनल हेल्थ मिशन का यह सर्वे चौंकाने वाला है। इसके आंकड़े बताते हैं कि किशोर बहुत अधिक परेशान हैं। बढ़ती बेरोजगारी और भविष्य की चिंता युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य को बुरी तरह से बिगाड़ रही है।

सर्वे के डराने वाले आंकड़े और आत्महत्या के विचार

यह महत्वपूर्ण अध्ययन प्रदेश के ग्यारह हजार किशोरों पर किया गया है। सर्वे के नतीजे बताते हैं कि तरेपन प्रतिशत किशोर गंभीर तनाव में जी रहे हैं। वहीं चौदह प्रतिशत बच्चे सीधे तौर पर डिप्रेशन का शिकार हो चुके हैं। सबसे अधिक डराने वाली बात यह है कि पांच प्रतिशत बच्चों में आत्महत्या के विचार आ रहे हैं। पंद्रह से अठारह साल के बच्चे इन नकारात्मक विचारों से सबसे ज्यादा घिरे हुए हैं। यह स्थिति बहुत खतरनाक है।

तनाव के मुख्य कारण: बेरोजगारी और भविष्य का डर

पूर्व केंद्रीय मंत्री शांता कुमार ने इस भयंकर मानसिक स्थिति के पीछे के कारणों को स्पष्ट किया है। युवाओं में अपने करियर को लेकर जबरदस्त डर बना हुआ है। चारों तरफ फैल रही बेरोजगारी उन्हें निराश कर रही है। जनसंख्या में तेजी से हो रही वृद्धि के कारण रोजगार के अवसर घट रहे हैं। नौकरियां नहीं मिलने से आत्महत्या के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। यह एक बहुत बड़ा संकट है। सरकार और पूरे समाज को तुरंत जागना होगा।

बचाव का रास्ता: योग और नैतिक शिक्षा की जरूरत

इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए शांता कुमार ने कुछ अहम सुझाव दिए हैं। उनका मानना है कि युवाओं को बचाने के लिए स्कूलों में योग की पढ़ाई जरूरी है। नैतिक शिक्षा को भी एक अनिवार्य विषय के रूप में लागू करना चाहिए। इसके अलावा बढ़ती जनसंख्या पर रोक लगाना सबसे ज्यादा आवश्यक है। सरकार को इन सभी बिंदुओं पर तुरंत ध्यान देना होगा। सही दिशा और मार्गदर्शन मिलने से ही युवा पीढ़ी का भविष्य पूरी तरह सुरक्षित होगा।

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