New Delhi News: चुनावी गहमागहमी के बीच भाषाई मर्यादा लांघने के मामले में भारत निर्वाचन आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ “आतंकवादी” शब्द का इस्तेमाल करने पर कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इस मामले में आयोग ने खरगे से 24 घंटे के भीतर लिखित जवाब मांगा है। बीजेपी की शिकायत पर हुई इस त्वरित कार्रवाई ने राजनीतिक हलकों में खलबली मचा दी है और कांग्रेस के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं।
आचार संहिता के उल्लंघन पर चुनाव आयोग सख्त
चुनाव आयोग ने खरगे के बयान को आदर्श आचार संहिता का स्पष्ट उल्लंघन माना है। आयोग के अनुसार, चुनाव प्रचार के दौरान किसी भी नेता को व्यक्तिगत स्तर पर अपमानजनक टिप्पणी करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। एक सार्वजनिक रैली के दौरान दिए गए इस विवादास्पद बयान को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी। बीजेपी का तर्क है कि यह बयान न केवल प्रधानमंत्री पद की गरिमा के खिलाफ है, बल्कि देश के करोड़ों मतदाताओं का भी अपमान है।
24 घंटे का अल्टीमेटम और संभावित कड़ी कार्रवाई
मल्लिकार्जुन खरगे को अपना पक्ष रखने के लिए कल तक का समय दिया गया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया, तो सख्त कदम उठाए जाएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि आयोग खरगे के चुनाव प्रचार करने पर 24 से 72 घंटे तक का प्रतिबंध लगा सकता है। पूर्व में भी आयोग ने भड़काऊ भाषणों के चलते कई दिग्गज नेताओं के खिलाफ इसी तरह की पाबंदियां लगाकर कड़ा संदेश दिया है।
कांग्रेस की रणनीति और राजनीतिक समीकरण
नोटिस मिलने के बाद कांग्रेस पार्टी अब अपने बचाव की तैयारी कर रही है। हालांकि, चुनाव के इस नाजुक मोड़ पर इस तरह का विवाद पार्टी को रक्षात्मक स्थिति में ला सकता है। दूसरी ओर, बीजेपी इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाने की योजना बना रही है ताकि सहानुभूति बटोरी जा सके। आयोग की यह कार्रवाई यह भी संकेत देती है कि वह सोशल मीडिया और रैलियों में होने वाली बयानबाजी पर पैनी नजर रख रहा है ताकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया की सुचिता बनी रहे।
स्टार प्रचारक का दर्जा छिनने का बढ़ा खतरा
चुनाव आयोग केवल व्यक्तिगत प्रतिबंध तक ही सीमित नहीं रह सकता। यदि उल्लंघन गंभीर पाया जाता है, तो आयोग कांग्रेस पार्टी के लिए एक सख्त एडवाइजरी भी जारी कर सकता है। इसके तहत स्टार प्रचारकों की सूची से संबंधित कड़े निर्देश दिए जा सकते हैं या चेतावनी दी जा सकती है। भविष्य में ऐसे बयानों की पुनरावृत्ति होने पर सीधे एफआईआर दर्ज करने का आदेश भी दिया जा सकता है, जो किसी भी वरिष्ठ नेता के राजनीतिक करियर के लिए एक बड़ा झटका होगा।
