Delhi News: आम आदमी पार्टी (आप) को अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पार्टी के दिग्गज नेता राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल समेत सात राज्यसभा सांसदों ने आधिकारिक तौर पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थाम लिया है। इस सामूहिक दलबदल के बाद ‘आप’ के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने शुक्रवार को घोषणा की कि वह राज्यसभा सभापति को पत्र सौंपकर इन सभी सांसदों की सदस्यता अयोग्य घोषित करने की मांग करेंगे।
संविधान की दसवीं अनुसूची का दिया हवाला
संजय सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर अपनी रणनीति साझा करते हुए कहा कि राघव चड्ढा और उनके साथियों का भाजपा में जाना सीधे तौर पर दलबदल विरोधी कानून का उल्लंघन है। उन्होंने तर्क दिया कि अपनी मूल पार्टी को छोड़कर दूसरी पार्टी में शामिल होना स्वेच्छा से सदस्यता त्यागने के समान है। संजय सिंह ने इसे ‘ऑपरेशन लोटस’ का हिस्सा करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा पंजाब की भगवंत मान सरकार के विकास कार्यों में बाधा डालने के लिए साजिश रच रही है।
सदन में दो-तिहाई बहुमत के साथ विलय का दावा
दूसरी ओर, राघव चड्ढा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बेहद चौंकाने वाला दावा पेश किया है। उन्होंने बताया कि ‘आप’ के 10 में से 7 राज्यसभा सांसदों ने एक गुट के रूप में भाजपा में विलय का फैसला किया है। इसमें स्वाति मालीवाल और हरभजन सिंह जैसे बड़े नाम भी शामिल बताए जा रहे हैं। चड्ढा के अनुसार, चूंकि दो-तिहाई से अधिक सांसदों ने इस दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए हैं, इसलिए तकनीकी रूप से उन पर दलबदल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई नहीं हो सकती।
पंजाब की राजनीति में मचेगा बड़ा घमासान
इस घटनाक्रम के बाद पंजाब और दिल्ली की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। संजय सिंह ने कड़े शब्दों में कहा कि पंजाब की जनता इन “धोखेबाज” सांसदों को कभी माफ नहीं करेगी। वहीं, राघव चड्ढा ने राज्यसभा सभापति को व्यक्तिगत रूप से हस्ताक्षरित दस्तावेज सौंपने की पुष्टि कर दी है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम आगामी चुनावों से पहले आम आदमी पार्टी की राष्ट्रीय साख को कमजोर करने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
