स्वच्छता सर्वेक्षण 2026: मेरठ नगर निगम के दावों की खुली पोल, फीडबैक में पिछड़ा शहर

Uttar Pradesh News: मेरठ में स्वच्छता सर्वेक्षण 2026 की तैयारियों को लेकर नगर निगम के दावों और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर नजर आ रहा है। क्यूआईसी (QIC) टीम के आगामी निरीक्षण से पहले शहर की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। सड़कों पर कूड़े के ढेर, जलता हुआ कचरा और गंदगी से अटे नाले निगम के सफाई अभियान पर सवालिया निशान लगा रहे हैं। जनभागीदारी की कमी के कारण सिटीजन फीडबैक के ताजा आंकड़ों में मेरठ अभी तक शीर्ष पांच शहरों में भी अपनी जगह बनाने में नाकाम रहा है।

कागजी दावों और जमीनी हकीकत में भारी अंतर

स्वच्छता सर्वेक्षण के शुरुआती फीडबैक में मेरठ 74,126 अंकों के साथ उत्तर प्रदेश में सातवें स्थान पर है। नगर निगम भले ही वॉल पेंटिंग और जनजागरूकता अभियानों के जरिए रैंकिंग सुधारने का प्रयास कर रहा है, लेकिन मुख्य समस्या कूड़ा निस्तारण अब भी बरकरार है। शहर के दो प्रमुख प्रवेश मार्गों पर लगे कूड़े के पहाड़ मेरठ की सूरत बिगाड़ रहे हैं। डस्टबिन और सीवर लाइनों की बदहाली यह दर्शाती है कि निगम का ध्यान बुनियादी ढांचे के बजाय केवल कागजी औपचारिकताएं पूरी करने पर है।

डैशबोर्ड के आंकड़े: सेग्रीगेशन और स्वच्छता में फिसड्डी

मेरठ नगर निगम के आधिकारिक डैशबोर्ड के अनुसार, डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन का दावा मात्र 42 प्रतिशत है। सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि स्रोत पर कचरा पृथक्करण (सेग्रीगेशन) केवल 2 प्रतिशत ही हो पा रहा है। सार्वजनिक शौचालयों की स्वच्छता के मामले में निगम का स्कोर शून्य है, जो बेहद निराशाजनक है। हालांकि, निगम 100 प्रतिशत अपशिष्ट प्रसंस्करण का दावा कर रहा है, लेकिन जल निकायों की सफाई की स्थिति अभी भी 67 प्रतिशत पर अटकी हुई है।

सिटीजन फीडबैक: लखनऊ टॉप पर, मेरठ सातवें पायदान पर

स्वच्छता सर्वेक्षण के 1000 अंकों वाले फीडबैक राउंड में उत्तर प्रदेश के शहरों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा चल रही है। 3,01,008 अंकों के साथ लखनऊ प्रदेश में पहले स्थान पर बना हुआ है, जबकि कानपुर और आगरा क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं। मेरठ 74,126 अंकों के साथ सातवें स्थान पर है, जो उसकी कमजोर रैंकिंग को दर्शाता है। लखनऊ और अलीगढ़ जैसे शहरों की तुलना में मेरठ के नागरिक स्वच्छता ऐप और वेब पोर्टल पर फीडबैक देने में काफी पीछे रह गए हैं।

सर्वेक्षण मूल्यांकन की जटिल पद्धति और स्थानीय शिकायतें

सर्वेक्षण का मूल्यांकन जन भागीदारी, जमीनी निरीक्षण और सेवा स्तर की प्रगति के आधार पर किया जाएगा। कुल 1000 अंकों में से 540 अंक डायरेक्ट ऑब्जरवेशन और 240 अंक फील्ड निरीक्षण के लिए निर्धारित हैं। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि हापुड़ रोड से भूमिया पुल तक सड़कों पर कूड़े के अंबार लगे हैं, जिन्हें सर्वेक्षण टीम से छिपाने की कोशिश की जा सकती है। लोगों का कहना है कि टूटे हुए नाले और खुले सीवर निगम की लापरवाही का स्पष्ट प्रमाण हैं।

निगम की उम्मीदें और भविष्य की रणनीति

निगम अधिकारियों का मानना है कि फीडबैक की संख्या धीरे-धीरे बढ़ रही है और वे जल्द ही टॉप फाइव शहरों में शामिल हो जाएंगे। मानकों को पूरा करने के लिए विशेष सफाई अभियान और वेस्ट-टू-वंडर पार्क जैसे प्रोजेक्ट्स पर काम तेज कर दिया गया है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक कूड़ा निस्तारण और कचरा पृथक्करण जैसी बुनियादी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं होगा, तब तक रैंकिंग में बड़ा सुधार लाना मेरठ के लिए एक बड़ी चुनौती बना रहेगा।

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