New Delhi News: देश में बढ़ते इलाज के खर्चों के बीच केंद्र सरकार अब निजी अस्पतालों की मनमानी पर बड़ा प्रहार करने जा रही है। स्वास्थ्य मंत्रालय एक ऐसी योजना तैयार कर रहा है जिससे अस्पतालों की ओवरबिलिंग पर कड़ी लगाम लगेगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार अब अस्पतालों द्वारा वसूले जाने वाले शुल्कों की अधिकतम सीमा तय कर सकती है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य मरीजों को वित्तीय शोषण से बचाना और स्वास्थ्य सेवाओं को पारदर्शी बनाना है।
मेडिकल उपकरणों पर भारी मुनाफे का होगा अंत
सरकार विशेष रूप से उन मेडिकल डिवाइस और उपभोग सामग्रियों को नियंत्रित करेगी जिन पर अस्पताल भारी मुनाफा कमाते हैं। इनमें सिरिंज, कैनुला और ग्लव्स जैसे जरूरी उत्पाद शामिल हैं। वर्तमान में कई अस्पताल इन उत्पादों की मूल लागत पर कई गुना अधिक शुल्क वसूल रहे हैं। नई व्यवस्था के तहत अस्पताल अब इन उत्पादों की लागत पर एक निश्चित प्रतिशत से ज्यादा मुनाफा नहीं ले पाएंगे। इससे इलाज के कुल खर्च में बड़ी गिरावट आने की उम्मीद है।
वास्तविक लागत से 30 गुना तक ज्यादा बिलिंग का खुलासा
हालिया जांच में अस्पतालों की बिलिंग को लेकर बेहद चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। कई निजी अस्पताल मरीजों से वास्तविक लागत के मुकाबले 10 से 30 गुना अधिक पैसा ले रहे हैं। उदाहरण के तौर पर, मात्र 3 रुपये की सिरिंज के लिए मरीजों से 30 रुपये तक वसूले जा रहे हैं। इसी तरह 6 रुपये की कैनुला का बिल 120 रुपये तक बनाया जा रहा है। पेसमेकर और हार्ट वाल्व जैसे महंगे उपकरणों पर भी भारी लूट मची है।
बीमा प्रीमियम और आम आदमी पर बढ़ता आर्थिक बोझ
अस्पतालों की यह ओवरबिलिंग न केवल मरीजों की जेब खाली कर रही है, बल्कि स्वास्थ्य बीमा क्षेत्र को भी नुकसान पहुंचा रही है। अस्पताल के बढ़ते खर्चों के कारण बीमा कंपनियां लगातार प्रीमियम बढ़ा रही हैं। इससे मध्यम वर्ग के लिए अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं लेना अब चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। सरकार का यह नया प्रस्ताव बीमा क्षेत्र के दबाव को कम करने में भी मददगार साबित होगा। इससे आम लोगों के लिए स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी खरीदना पहले से सस्ता हो सकता है।
हितधारकों से चर्चा के बाद लागू होगा नया ढांचा
स्वास्थ्य मंत्रालय इस प्रस्ताव को अंतिम रूप देने से पहले सभी संबंधित पक्षों से बातचीत कर रहा है। इसमें बीमा कंपनियां, मेडिकल डिवाइस इंडस्ट्री और निजी अस्पतालों के प्रतिनिधि शामिल हैं। सरकार का लक्ष्य एक ऐसा संतुलित ढांचा तैयार करना है जिससे मरीजों को राहत मिले। साथ ही, यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि अस्पतालों की सेवाओं की गुणवत्ता पर कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े। राज्यों को पहले ही बिलिंग में पारदर्शिता लाने के सख्त निर्देश दिए जा चुके हैं।
