Maharashtra News: मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक सनसनीखेज सेक्सटॉर्शन गिरोह का भंडाफोड़ किया है। इस गिरोह में जम्मू-कश्मीर की एक महिला क्रिकेटर भी शामिल है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। कोलाबा के एक कारोबारी को अपनी जाल में फंसाकर आरोपियों ने लाखों रुपये की उगाही की। इस मामले के सामने आने के बाद डिजिटल दुनिया में सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर नई बहस छिड़ गई है।
सोशल मीडिया पर दोस्ती से शुरू हुआ ब्लैकमेलिंग का खेल
पुलिस जांच में पता चला कि पीड़ित कारोबारी की मुलाकात साल 2024 में फरखंदा अजीज खान से हुई थी। शुरुआत में दोनों के बीच सामान्य बातचीत हुई, लेकिन आरोपी महिला ने धीरे-धीरे पीड़ित को भरोसे में ले लिया। बातचीत निजी और आपत्तिजनक होने के बाद असली खेल शुरू हुआ। महिला ने कारोबारी को आपत्तिजनक चैट्स और स्क्रीनशॉट सार्वजनिक करने की धमकी दी। बदनामी के डर से पीड़ित ने शुरू में चुपचाप पैसे देना बेहतर समझा।
दो साल में 32 बार हुआ करोड़ों का ट्रांजेक्शन
आरोपियों ने कारोबारी पर मानसिक दबाव बनाकर किस्तों में पैसे ऐंठना शुरू किया। अप्रैल 2024 से लेकर जनवरी 2026 के बीच पीड़ित ने करीब 32 अलग-अलग ट्रांजेक्शन किए। इस दौरान उसने कुल 23.61 लाख रुपये आरोपियों के खाते में भेजे। हालांकि, गिरोह का लालच यहीं खत्म नहीं हुआ। जनवरी 2026 में धमकियों का दौर तेज कर दिया गया। आरोपियों ने कारोबारी से 40 लाख रुपये की अतिरिक्त मांग की और पूरी रकम वसूल ली।
संगठित गिरोह का दिल्ली और श्रीनगर तक फैला जाल
जांच में खुलासा हुआ कि फरखंदा अजीज खान के साथ उसका भाई बाजिल और सहयोगी उद्दीन इम्तियाज वानी भी शामिल थे। पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस और बैंक खातों के विश्लेषण के आधार पर गिरोह का पता लगाया। फरखंदा और उसके भाई को दिल्ली के एक नामी होटल से दबोचा गया। वहीं, तीसरे आरोपी वानी को श्रीनगर से गिरफ्तार किया गया। वानी के खाते में ही उगाही की रकम का बड़ा हिस्सा ट्रांसफर किया गया था।
कड़ी धाराओं के तहत मामला दर्ज, पुलिस की सख्त चेतावनी
मुंबई पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आईटी एक्ट की सख्त धाराओं में केस दर्ज किया है। क्राइम ब्रांच अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या इस गिरोह ने अन्य लोगों को भी अपना शिकार बनाया है। पुलिस ने नागरिकों को आगाह किया है कि वे अनजान लोगों से ऑनलाइन दोस्ती न करें। किसी भी ब्लैकमेलिंग की स्थिति में डरे बिना तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन या साइबर सेल में सूचना दें।
