New Delhi News: दिल्ली के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले करीब 10 लाख छात्रों की बुनियादी शिक्षा पर बड़ा संकट खड़ा हो गया है। अदालती आदेश के बावजूद नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने के हफ्तों बाद भी छात्रों को किताबें और कॉपियां नहीं मिल सकी हैं। इस गंभीर लापरवाही के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में शिक्षा सचिव के विरुद्ध अवमानना याचिका दायर की गई है। आरोप है कि विभाग ने जानबूझकर अदालती निर्देशों की अनदेखी की है, जिससे लाखों बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
हाईकोर्ट के सख्त निर्देशों की धज्जियां उड़ाने का आरोप
गैर-सरकारी संगठन ‘सोशल जूरिस्ट’ ने अधिवक्ता अशोक अग्रवाल के माध्यम से यह अवमानना याचिका दाखिल की है। इसमें कहा गया है कि दिल्ली सरकार के शिक्षा सचिव ने पहली से आठवीं कक्षा तक के छात्रों को पाठ्य पुस्तकें प्रदान करने के मामले में अदालत के निर्देशों का जानबूझकर उल्लंघन किया है। याचिका में संविधान के अनुच्छेद 215 के तहत कार्रवाई की मांग की गई है। विभाग की इस सुस्ती ने दिल्ली के सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है।
अदालत को दिए लिखित आश्वासन का नहीं हुआ पालन
याचिका के अनुसार, शिक्षा विभाग ने पहले हाईकोर्ट में यह भरोसा दिया था कि सभी छात्रों को समय पर किताबें और स्टेशनरी उपलब्ध कराई जाएगी। अदालत ने 4 जुलाई 2024 को इस आश्वासन को रिकॉर्ड पर लेते हुए समय सीमा का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद, 1 अप्रैल 2026 से नया सत्र शुरू होने के बाद भी छात्र खाली हाथ हैं। यह स्थिति अदालती अवमानना के साथ-साथ छात्रों के शिक्षा के अधिकार का भी हनन है।
गर्मी की छुट्टियों के कारण बढ़ सकती है छात्रों की मुश्किल
दिल्ली के सरकारी स्कूल आगामी 9 मई से गर्मी की छुट्टियों के लिए बंद होने वाले हैं। इसके बाद स्कूल सीधे 1 जुलाई को ही खुलेंगे। याचिका में चिंता जताई गई है कि यदि अभी कार्रवाई नहीं हुई, तो छात्रों को अगले 3 महीनों तक बिना किताबों के रहना पड़ेगा। विभाग के आंतरिक नियमों के मुताबिक किताबें मार्च के आखिरी हफ्ते तक मिल जानी चाहिए थीं। देरी के कारण छात्रों की शैक्षणिक प्रगति पूरी तरह ठप पड़ने की आशंका है।
न्यायपालिका से शिक्षा सचिव पर कार्रवाई की बड़ी मांग
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि शैक्षणिक सामग्री खरीदने और वितरण में हुई देरी के लिए सीधे तौर पर प्रशासनिक विफलता जिम्मेदार है। अब हाईकोर्ट बुधवार को इस महत्वपूर्ण मामले पर सुनवाई कर सकता है। अगर अदालत ने सख्त रुख अपनाया, तो शिक्षा विभाग के बड़े अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। दिल्ली के लाखों अभिभावक अब न्यायपालिका की ओर देख रहे हैं ताकि उनके बच्चों को जल्द से जल्द जरूरी पढ़ाई की सामग्री मिल सके और उनका साल खराब न हो।
