New Delhi News: भारतीय तेल-तिलहन बाजारों में बीते सप्ताह हलचल तेज रही, जहां सरसों, सोयाबीन और पाम तेल की कीमतों में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया। सस्ता होने के कारण सरसों तेल की मांग में जबरदस्त इजाफा हुआ है, जबकि गर्मियों के मौसम में औद्योगिक गतिविधियों के बढ़ने से कच्चे पाम तेल (CPO) की कीमतों को भी सहारा मिला है। हालांकि, ऊंचे भाव के कारण मूंगफली तेल की मांग प्रभावित हुई है, जिससे इसकी कीमतों में गिरावट देखी गई।
सरसों तेल की कीमतों में सुधार और बाजार का वर्तमान रुझान
बाजार के जानकारों का कहना है कि उत्तर भारत के राज्यों में सरसों तेल, सोयाबीन तेल के मुकाबले करीब 12 से 14 रुपये प्रति किलो सस्ता बिक रहा है। यही मुख्य कारण है कि कम आय वर्ग के उपभोक्ताओं के बीच सरसों तेल की लोकप्रियता और खपत तेजी से बढ़ी है। बीते सप्ताह सरसों दाना 160 रुपये की तेजी के साथ 7,000-7,025 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ। वहीं, दिल्ली और दादरी मंडियों में भी सरसों तेल की कीमतों में सुधार देखा गया।
सोयाबीन और डीओसी की बढ़ती मांग का कीमतों पर असर
देश में इन दिनों सोयाबीन के तेल-रहित खल यानी डी-आयल्ड केक (DOC) की स्थानीय मांग में भारी बढ़ोत्तरी दर्ज की जा रही है। इस बढ़ती मांग के कारण ही बीते सप्ताह सोयाबीन तिलहन की कीमतों में भी सुधार का रुख बना रहा। थोक बाजार में सोयाबीन दाना और सोयाबीन लूज के भाव में 375 रुपये तक की बढ़त देखी गई। हालांकि, आयातकों द्वारा लागत से कम दाम पर बिकवाली जारी रखने के कारण सोयाबीन रिफाइंड तेल की कीमतें लगभग स्थिर बनी हुई हैं।
खाद्य तेलों पर आयात शुल्क में वृद्धि और पाम तेल का रुख
केंद्र सरकार ने महीने की शुरुआत में ही आयातित खाद्य तेलों के आयात शुल्क मूल्य में संशोधन किया है, जिसका सीधा असर बाजार पर पड़ा है। सरकार ने कच्चे पाम तेल (CPO) के आयात शुल्क मूल्य में 44 रुपये और पामोलीन पर 94 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की है। इस फैसले के बाद सीपीओ और पामोलीन की कीमतों में सुधार आया। इसके अलावा, गर्मी के मौसम में आइसक्रीम और अन्य खाद्य उद्योगों में पाम तेल की खपत काफी बढ़ गई है।
मूंगफली तेल की कीमतों में गिरावट और स्टॉक की चुनौतियां
एक तरफ जहां अधिकांश तेलों के दाम बढ़ रहे हैं, वहीं मूंगफली तेल-तिलहन के बाजार में नरमी का माहौल है। ऊंचे भाव के चलते ग्राहकों ने मूंगफली तेल से दूरी बना ली है, जिससे इसके दाम में 100 से 250 रुपये प्रति क्विंटल तक की गिरावट आई है। वर्तमान में मूंगफली की कीमतें न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से नीचे चल रही हैं। बाजार सूत्रों का सुझाव है कि सरकार को भविष्य की जरूरतों के लिए सोयाबीन और मूंगफली का पर्याप्त बफर स्टॉक बनाए रखना चाहिए।
सरसों की आवक और सटोरियों की सक्रियता पर विशेषज्ञों की राय
बाजार विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि सरसों के उत्पादन और आवक को लेकर कुछ भ्रामक अनुमान फैलाए जा रहे हैं। उनका मानना है कि कुछ तत्व किसानों का मनोबल तोड़कर उनकी उपज सस्ते में खरीदने की कोशिश कर रहे हैं। सरकार को इस समय सरसों के स्टॉक निर्माण पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में किसी भी संकट से बचा जा सके। फिलहाल बाजार में सटोरियों की बढ़ती सक्रियता भी कीमतों को प्रभावित करने का एक बड़ा कारण बनी हुई है।


