Himachal News: हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में पंचायत चुनाव की सरगर्मी के बीच एक बड़ी राजनीतिक हलचल देखने को मिल रही है। शिमला जिला की राजनीति में क्योंथल राजपरिवार की दूसरी पीढ़ी ने औपचारिक रूप से सक्रिय राजनीति में कदम रख दिया है। भाजपा ने क्योंथल रियासत से जुड़े युवा चेहरे कुशल सेन को जिला परिषद चुनाव के लिए अपना अधिकृत प्रत्याशी घोषित किया है। इस फैसले से शिमला ग्रामीण और कुसुम्पटी विधानसभा क्षेत्रों में नए राजनीतिक समीकरण बनने तय माने जा रहे हैं।
भविष्य की बड़ी बिसात: पंचायत से विधानसभा तक की तैयारी
कुशल सेन की उम्मीदवारी को राजनीतिक गलियारों में केवल एक स्थानीय चुनाव तक सीमित नहीं माना जा रहा है। जानकार इसे भविष्य की बड़ी राजनीति की नींव के तौर पर देख रहे हैं। उनकी माता ज्योति सेन पहले भी भाजपा के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ चुकी हैं। कुशल सेन को चुनावी मैदान में उतारकर भाजपा ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह क्षेत्र में नए और युवा नेतृत्व को बढ़ावा देना चाहती है। भाजपा समर्थकों के बीच इस फैसले को लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है।
शिमला की राजनीति पर राजपरिवारों का ऐतिहासिक दबदबा
शिमला जिले की सियासत में राजपरिवारों का प्रभाव हमेशा से ही निर्णायक रहा है। रामपुर रियासत के वीरभद्र सिंह परिवार का दशकों तक प्रदेश की सत्ता पर वर्चस्व रहा। वर्तमान में उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह और पुत्र विक्रमादित्य सिंह सरकार और संगठन में मजबूत स्थिति में हैं। इसी तरह कोटी रियासत के अनिरुद्ध सिंह भी वर्तमान सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं। कुशल सेन की एंट्री के बाद अब क्योंथल रियासत भी इस राजनीतिक प्रतिस्पर्धा में प्रमुखता से शामिल हो गई है।
क्योंथल रियासत का इतिहास: शिमला शहर से गहरा नाता
क्योंथल रियासत का इतिहास अत्यंत गौरवशाली रहा है। इसकी स्थापना 13वीं शताब्दी में कोट कहलूर के गिर सेन ने की थी। दिलचस्प तथ्य यह है कि वर्तमान शिमला शहर का निर्माण क्योंथल रियासत के 12 गांवों को लेकर ही किया गया था। अंग्रेजों ने 1815 में गोरखा युद्ध के बाद तत्कालीन राणा संसार सेन से इन गांवों को लेकर एक हिल स्टेशन विकसित किया था। 15 अप्रैल 1948 को इस रियासत का विलय भारतीय गणराज्य के हिमाचल प्रदेश में कर दिया गया था।
भाजपा की रणनीति: कुसुम्पटी फतह के लिए नया चेहरा
भाजपा आगामी विधानसभा चुनावों के लिए कुसुम्पटी क्षेत्र में एक ऐसे चेहरे की तलाश में थी जिसकी सामाजिक पकड़ मजबूत हो। राजपरिवार से जुड़ा होने के कारण कुशल सेन की क्षेत्र में ऐतिहासिक और भावनात्मक पकड़ मानी जाती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पंचायत चुनाव भाजपा के लिए एक ट्रायल की तरह है। यदि कुशल सेन यहां सफल रहते हैं, तो भविष्य में वह विधानसभा चुनाव के लिए भी पार्टी के प्रमुख दावेदार बनकर उभर सकते हैं।

