Himachal News: राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के ताजा आंकड़ों ने हिमाचल प्रदेश में नशे के बढ़ते जाल को लेकर चौंकाने वाला खुलासा किया है। वर्ष 2024 में ड्रग तस्करी के मामलों में हिमाचल प्रदेश पूरे देश में दूसरे स्थान पर रहा है। प्रदेश में प्रति लाख आबादी पर तस्करी की अपराध दर 17.2 दर्ज की गई, जो राष्ट्रीय औसत से छह गुना अधिक है। हालांकि पिछले साल के मुकाबले कुल मामलों में गिरावट आई है, लेकिन तस्करी की उच्च दर प्रशासन के लिए बड़ी चिंता बनी हुई है।
ड्रग तस्करी और अपराध दर के डराने वाले आंकड़े
एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार, हिमाचल प्रदेश में एनडीपीएस अधिनियम के तहत कुल 1,715 मामले दर्ज किए गए हैं। प्रति लाख आबादी पर यहां अपराध दर 22.8 रही, जो राष्ट्रीय औसत 7.8 से लगभग तीन गुना ज्यादा है। समग्र एनडीपीएस मामलों की श्रेणी में हिमाचल देश में चौथे स्थान पर है। इस सूची में केरल पहले, पंजाब दूसरे और मिजोरम तीसरे स्थान पर काबिज हैं। हिमाचल में दर्ज कुल मामलों में से 1,292 मामले सीधे तौर पर नशीले पदार्थों की तस्करी से जुड़े थे।
पंजाब और केरल से हिमाचल की तुलना
नशीले पदार्थों के अपराधों की गंभीरता को समझने के लिए अन्य राज्यों से तुलना अनिवार्य है। केरल में सबसे अधिक 27,149 मामले दर्ज हुए, जहां अपराध दर 75.5 रही। पड़ोसी राज्य पंजाब में 8,973 मामले सामने आए और वहां अपराध दर 29 दर्ज की गई। हिमाचल प्रदेश में व्यक्तिगत उपभोग के लिए नशा रखने के 423 मामले सामने आए। तस्करी के उद्देश्य से नशीले पदार्थ रखने के मामले में पंजाब 19.6 की दर के साथ पहले और हिमाचल 17.2 की दर के साथ दूसरे स्थान पर है।
पिछले वर्ष के मुकाबले मामलों में सुधार का दावा
राहत की बात यह है कि वर्ष 2023 की तुलना में 2024 में एनडीपीएस मामलों में 20.1 प्रतिशत की कमी देखी गई है। साल 2023 में प्रदेश में कुल 2,146 मामले दर्ज किए गए थे और तब अपराध दर 28.7 थी। उस दौरान हिमाचल नशा तस्करी के मामलों में देश में तीसरे स्थान पर था। वर्ष 2023 में तस्करी के 1,599 और व्यक्तिगत उपभोग के 547 मामले दर्ज हुए थे। आंकड़ों में आई यह गिरावट पुलिस द्वारा चलाए जा रहे नशा विरोधी अभियानों का परिणाम मानी जा रही है।
युवाओं में ‘चिट्टा’ और सिंथेटिक ड्रग्स का बढ़ता प्रभाव
हिमाचल प्रदेश पुलिस और कानून प्रवर्तन एजेंसियां राज्य के युवाओं में बढ़ते सिंथेटिक ड्रग्स के चलन से चिंतित हैं। खासकर ‘चिट्टा’ जैसे जानलेवा नशे ने राज्य के कई जिलों में अपनी जड़ें मजबूत कर ली हैं। पुलिस अधिकारियों ने कई मंचों पर युवाओं के बीच फैलते इस जहर पर गहरी चिंता व्यक्त की है। एनसीआरबी के आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि कड़ी कार्रवाई के बावजूद तस्करी की चुनौतियां बरकरार हैं। इसे रोकने के लिए राज्य सरकार अब और भी कड़े कदम उठाने की तैयारी कर रही है।

