Himachal News: हिमाचल प्रदेश में स्थानीय निकाय और पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं। नामांकन की प्रक्रिया शुरू होते ही निर्वाचन आयोग ने उम्मीदवारों की पात्रता को लेकर बेहद कड़े और स्पष्ट नियम जारी किए हैं। इस बार कई श्रेणियों के कार्यकर्ताओं के चुनाव लड़ने पर पूर्ण पाबंदी लगा दी गई है। सरकारी और अर्ध-सरकारी क्षेत्रों से जुड़े कर्मचारियों के लिए मैदान में उतरना अब आसान नहीं होगा। नामांकन पत्रों की जांच के दौरान इन नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाएगा।
इन कार्यकर्ताओं के चुनाव लड़ने पर रहेगी पूर्ण रोक
राज्य निर्वाचन आयोग के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका और आशा वर्कर इस बार चुनावी मैदान में नहीं उतर सकेंगी। इसके अलावा जल रक्षकों को भी चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित किया गया है। निर्धारित नियमों के तहत पार्ट टाइम कार्यकर्ताओं के नामांकन पर रोक लगाई गई है। सहायक निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे नामांकन पत्रों की सूक्ष्मता से जांच करें। यदि कोई पार्ट टाइम कार्यकर्ता चुनाव लड़ना चाहता है, तो उसका नामांकन रद्द कर दिया जाएगा।
इन्हें मिली चुनाव लड़ने की विशेष अनुमति
सख्त पाबंदियों के बीच आयोग ने कुछ वर्गों को बड़ी राहत भी दी है। आकस्मिक यानी कैजुअल लेबर और मौसमी आधार पर सेवाएं देने वाले लोग चुनाव लड़ सकते हैं। इनके लिए किसी भी प्रकार की रोक नहीं लगाई गई है। दिलचस्प बात यह है कि गृहरक्षकों (Home Guards) को भी चुनाव लड़ने की अनुमति दी गई है। चूंकि वे नियमित आधार पर नहीं बल्कि आवश्यकतानुसार अपनी सेवाएं प्रदान करते हैं, इसलिए उन्हें चुनावी प्रक्रिया से बाहर नहीं रखा गया है। यह निर्णय कई स्थानीय उम्मीदवारों के लिए राहत भरा है।
सरकारी और निगम कर्मचारियों के लिए बंद हुए रास्ते
स्थानीय निकाय निर्वाचन अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार, कोई भी सेवारत सरकारी कर्मचारी चुनाव नहीं लड़ सकता है। यह नियम राज्य और केंद्र सरकार के अधीन कार्यरत सभी कर्मचारियों पर समान रूप से लागू होता है। इसके दायरे में विभिन्न बोर्डों, निगमों, पंचायतों और सहकारी समितियों के कर्मचारी भी शामिल हैं। आयोग का मानना है कि सरकारी पदों पर रहते हुए चुनाव लड़ने से निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है। इसलिए प्रशासन ने इन श्रेणियों के लिए नामांकन की राह पूरी तरह बंद कर दी है।
अयोग्य घोषित और बर्खास्त कर्मियों पर भी गाज
चुनाव लड़ने की पात्रता को लेकर एक और महत्वपूर्ण नियम स्पष्ट किया गया है। सरकारी सेवा से बर्खास्त किए गए कर्मचारी या जिन्हें किसी गंभीर कारण से अयोग्य करार दिया गया है, वे चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। हालांकि, इसमें एक मानवीय पहलू भी शामिल है। यदि किसी व्यक्ति को केवल चिकित्सा आधार (Medical Grounds) पर सेवा के लिए अयोग्य घोषित किया गया था, तो वह चुनावी मैदान में उतर सकता है। ऐसे व्यक्तियों के लिए लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेने पर कोई कानूनी रोक नहीं होगी।


