Himachal News: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य के सरकारी कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है। अदालत ने सरकारी कर्मचारी अधिनियम को असंवैधानिक घोषित कर रद्द कर दिया है। देविंद्र कुमार बनाम हिमाचल राज्य मामले में अदालत ने यह सख्त फैसला सुनाया। सरकार द्वारा कर्मचारियों के लाभ रोकने और सेवा शर्तों में बदलावों को कानूनन गलत माना गया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि नियमित हुए कर्मचारियों की अनुबंध अवधि पेंशन लाभों के लिए जुड़ेगी।
अनुबंध कर्मचारियों के लिए नए दिशा-निर्देश
न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और रंजन शर्मा की खंडपीठ ने चार अहम सिद्धांत तय किए। अनुबंध काल की वार्षिक वेतन वृद्धि केवल सेवानिवृत्ति लाभों के लिए काल्पनिक आधार पर जुड़ेगी। इस अवधि का कोई एरियर कर्मचारियों को नहीं मिलेगा। नियमों के तहत नियुक्त कर्मचारियों को पहली नियुक्ति की तारीख से वरिष्ठता मिलेगी। पेंशन दावों को याचिका दायर करने से तीन साल पहले तक सीमित रखा जा सकता है।
तीन महीने में कर्मचारियों को लाभ देने के आदेश
अदालत ने याचिकाकर्ता दलीप सिंह को अपना पक्ष रखने की अनुमति दी है। सरकार को तीस जून तक इस मामले में एक सकारण आदेश पारित करना होगा। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में यह बिल्कुल स्पष्ट कर दिया है कि जिन कर्मचारियों के हक में पहले ही अदालती फैसले आ चुके हैं, उन्हें जल्द राहत मिले। राज्य सरकार को अगले तीन महीनों के भीतर इन सभी कर्मचारियों के लाभ सुनिश्चित करने होंगे।
पदोन्नति प्रक्रिया पर हाईकोर्ट की सख्त रोक
हाईकोर्ट ने सहायक अभियंता पदों पर कोटे के तहत जूनियर कर्मचारियों की पदोन्नति रोक दी है। राज्य सरकार ने हाल ही में नियमों में एक नया संशोधन किया था। अदालत ने ग्यारह फरवरी की अधिसूचना के अमल पर अगली सुनवाई तक स्टे लगा दिया है। खंडपीठ ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है। अदालत ने बाईस अन्य कर्मचारियों को भी इस मामले में पक्षकार बनाया है।
पुरानी व्यवस्था से पदोन्नति जारी रखने की छूट
यह आदेश अमन परमार की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया। याचिकाकर्ताओं ने सरकार के नए संशोधन को चुनौती दी थी। उनका आरोप था कि जूनियर कर्मचारियों को अनुचित लाभ मिलेगा। अदालत ने राज्य सरकार को एक बड़ी राहत भी प्रदान की है। हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार चाहे तो पुराने नियमों के आधार पर पदोन्नति प्रक्रिया जारी रखे। इस पूरे मामले की अगली सुनवाई पंद्रह जून को होगी।
बिना अनुमति याचिका वापस लेने पर दोबारा सुनवाई नहीं
हाईकोर्ट ने एक अन्य मामले में कानूनी प्रक्रिया को लेकर अहम आदेश दिया। अदालत ने साफ किया कि अगर कोई याचिकाकर्ता बिना अनुमति अपनी याचिका वापस लेता है, तो वह उसी मुद्दे पर नई याचिका नहीं लगा सकता। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल ने कुलदीप कुमार मामले में यह व्यवस्था दी। याचिकाकर्ताओं ने नियमितीकरण के लिए दोबारा मामला दायर किया था। कोर्ट ने माना कि इससे कानूनी अधिकार खत्म होता है।
बेंच हंटिंग पर रोक और सोलन का मामला
अदालत ने टिप्पणी की कि इस नियम का मुख्य उद्देश्य बेंच हंटिंग की गलत प्रवृत्ति को रोकना है। वहीं दूसरी तरफ हाईकोर्ट में नगर निगम सोलन के वार्ड तीन से भाजपा उम्मीदवार पीयूष का नामांकन रद्द होने पर सुनवाई हुई। एसडीएम सोलन ने उम्मीदवार के पिता पर सरकारी जमीन पर अतिक्रमण के आरोप में यह कार्रवाई की थी। वकील ने इसे नगर निगम अधिनियम के खिलाफ बताया।
उत्सव बैंस बने एनएचएआई के नए स्टैंडिंग काउंसिल
नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने एडवोकेट उत्सव बैंस को हिमाचल हाईकोर्ट में स्टैंडिंग काउंसिल नियुक्त किया है। उत्सव बैंस वर्तमान में केंद्र सरकार के कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों में सीनियर स्टैंडिंग काउंसिल के रूप में सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने कानून की पढ़ाई पंजाब यूनिवर्सिटी और हार्वर्ड लॉ स्कूल से पूरी की है। बैंस देश के कई बड़े और संवेदनशील आतंकी मामलों की पैरवी कर चुके हैं।


