तीन दिन में ही करोड़ों की चोरी, पुलिस वेरिफिकेशन से बचने के लिए रोज बदलती थी बहाना, शालीमार बाग में ‘अनीता’ ने फिर दिया वारदात को अंजाम

Delhi News: राष्ट्रीय राजधानी में घरेलू सहायकों के बिना पुलिस वेरिफिकेशन के रखे जाने का खतरा एक बार फिर उजागर हुआ है। शालीमार बाग इलाके में एक शातिर महिला ने महज तीन दिन के भीतर ही एक कारोबारी के घर से करीब डेढ़ करोड़ रुपये के आभूषण और नकदी पर हाथ साफ कर दिया। यह वही महिला है जो पिछले साल अक्टूबर में इसी इलाके में एक अन्य व्यवसायी के यहां से एक करोड़ रुपये की चोरी कर चुकी है। पुलिस के हाथ अब तक खाली हैं और आरोपी लगातार वारदातों को अंजाम दे रही है।

आधार कार्ड मांगने पर दो दिन तक लगाती रही टालमटोल

कारोबारी विजयपाल गुप्ता ने इस महिला को घरेलू काम के लिए 17 अप्रैल को रखा था। उन्होंने वेरिफिकेशन के लिए जैसे ही आधार कार्ड मांगा, महिला ने अगले दिन लाने का वादा कर दिया। दूसरे दिन जब फिर पूछा गया तो उसने भूल जाने का बहाना बना दिया। इसी बीच तीसरे दिन सुबह जब परिवार पूजा में व्यस्त था तभी उसने वारदात को अंजाम दे दिया। वह पहले से स्क्रू ड्राइवर लेकर आई थी और उसी से अलमारी का ताला तोड़कर सारा कीमती सामान समेट ले गई।

डेढ़ करोड़ के जेवर और पांच लाख कैश लेकर फरार

विजयपाल गुप्ता प्लास्टिक फैक्ट्री के संचालक हैं और शालीमार बाग के बीक्यू-ब्लॉक में रहते हैं। 19 अप्रैल की सुबह साढ़े दस बजे उनकी पत्नी के साथ वह पूजा कर रहे थे। इसी दौरान घरेलू सहायिका ने अलमारी खोलकर सोने के आभूषण चुरा लिए। आभूषणों की अनुमानित कीमत डेढ़ करोड़ रुपये बताई जा रही है। इसके अलावा वह करीब चार से पांच लाख रुपये की नकदी भी लेकर फरार हो गई। घटना की सूचना पर पुलिस ने मामला दर्ज कर तलाश शुरू कर दी है।

छह महीने पहले भी इसी तरह की थी चोरी

यह पहली बार नहीं है जब इस महिला ने इस तरह की वारदात की हो। पिछले साल अक्टूबर महीने में शालीमार बाग के बीएम-ब्लॉक में रहने वाले कारोबारी जयभगवान गर्ग के घर भी यही महिला काम करने आई थी। वहां भी उसने आधार कार्ड मांगने पर टालमटोल की और तीसरे दिन चोरी कर फरार हो गई। उस वक्त वह करीब पचास लाख रुपये नकद और पचास लाख रुपये के जेवरात लेकर गायब हो गई थी। जयभगवान गर्ग ने बताया कि चोरी का तरीका बिल्कुल एक जैसा है।

सीसीटीवी में कैद हुआ चेहरा फिर भी नहीं पकड़ी गई

जयभगवान गर्ग के घर हुई चोरी के दौरान पास के एक मंदिर में लगे सीसीटीवी कैमरे में आरोपी महिला का चेहरा साफ कैद हो गया था। फोटो में उसका चेहरा बिल्कुल स्पष्ट दिखाई दे रहा है। इसके बावजूद दिल्ली पुलिस छह महीने से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी उस तक नहीं पहुंच पाई है। अब उसी महिला ने उनके ही परिचित विजयपाल गुप्ता के घर को निशाना बनाया है। इससे पुलिस की कार्यप्रणाली और जांच की गति पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

पीतमपुरा में भी दे चुकी है वारदात को अंजाम

जांच में यह भी सामने आया है कि इस शातिर महिला ने पिछले साल पीतमपुरा इलाके में भी एक बड़ी चोरी की थी। जयभगवान गर्ग के अनुसार उनके घर चोरी से कुछ दिन पहले ही इसी महिला ने पीतमपुरा में एक अन्य परिवार को अपना शिकार बनाया था। वहां भी उसने घरेलू सहायिका बनकर घर में प्रवेश किया और कुछ ही दिनों में मौका पाकर कीमती सामान लेकर फरार हो गई। इससे साफ है कि महिला एक संगठित गिरोह का हिस्सा हो सकती है जो बिना वेरिफिकेशन के काम पाने वाले घरों को टारगेट करता है।

पुलिस वेरिफिकेशन की अनदेखी बनी बड़ी वजह

दिल्ली पुलिस बार-बार नागरिकों से अपील करती है कि वे बिना पुलिस वेरिफिकेशन के किसी भी नौकर या सहायिका को न रखें। लेकिन व्यस्त जीवनशैली और जल्दबाजी में अक्सर लोग इस जरूरी प्रक्रिया को नजरअंदाज कर देते हैं। यह मामला इस बात का ताजा उदाहरण है कि वेरिफिकेशन में की गई लापरवाही कितनी भारी पड़ सकती है। अगर समय पर आधार कार्ड की जांच कर ली गई होती तो शायद इतनी बड़ी चोरी को टाला जा सकता था। विशेषज्ञों का कहना है कि नियोक्ताओं को कर्मचारियों की पृष्ठभूमि की जांच अवश्य करानी चाहिए।

पुलिस ने कहा, जल्द ही आरोपी को किया जाएगा गिरफ्तार

इस ताजा चोरी की घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच तेज कर दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी महिला की पहचान कर ली गई है और उसकी गिरफ्तारी के लिए कई टीमें गठित की गई हैं। पुराने मामलों की फाइलें भी दोबारा खोलकर जांच की जा रही है। पुलिस को उम्मीद है कि जल्द ही इस शातिर महिला को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। फिलहाल इलाके के निवासियों में इस घटना के बाद भारी दहशत का माहौल है। लोग अपने घरेलू कर्मचारियों के वेरिफिकेशन को लेकर अब ज्यादा सतर्क हो गए हैं।

घरेलू सहायिका ने बताया था अपना नाम अनीता

पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार आरोपी महिला ने अपना नाम अनीता बताया था। उसकी उम्र करीब पैंतीस वर्ष के आसपास है। वह हिंदी भाषा अच्छी तरह बोल और समझ लेती है। पुलिस का मानना है कि यह नाम फर्जी भी हो सकता है। आरोपी इतनी शातिर है कि वह हर वारदात में अपनी पहचान बदल लेती है। उसके चेहरे की फोटो सीसीटीवी में होने के बावजूद उसकी गिरफ्तारी न होना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती है। पुलिस अब उसके पुराने रिकॉर्ड खंगाल रही है और संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही है। इस घटना ने एक बार फिर राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा दिया है। लोगों ने पुलिस आयुक्त से जल्द कार्रवाई की मांग की है।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
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