World News: विश्व आर्थिक मंच (WEF) के पूर्व निदेशक फ्रैंक-युर्गेन रिक्टर ने वैश्विक अर्थव्यवस्था और भू-राजनीति पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने दुनिया की मौजूदा स्थिति को ‘परफेक्ट स्टॉर्म’ (एक साथ कई संकट) करार दिया। रिक्टर ने कहा कि मध्य पूर्व युद्ध, ऊर्जा संकट और भविष्य में एआई का बढ़ता प्रभाव वैश्विक स्थिरता के लिए गंभीर खतरा है। उन्होंने यूरोप पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि वह ‘सॉवरेन एआई’ विकसित करने का अवसर चूक गया है। वहीं भारत को वह एक मजबूत और सकारात्मक उदाहरण के रूप में देखते हैं।
यूरोप की बेरोजगारी और विनिर्माण में गिरावट ने बढ़ाई चिंता
रिक्टर ने कहा कि यूरोप की अर्थव्यवस्था बेहद कमजोर स्थिति में है। वहां बेरोजगारी तेजी से बढ़ रही है और विकास दर धीमी हो गई है। उन्होंने यूरोप पर सबसे बड़ा आरोप यह लगाया कि उसने समय रहते अपना स्वतंत्र और मजबूत एआई सिस्टम (सॉवरेन एआई) विकसित नहीं किया। इसके चलते यूरोप वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा में पिछड़ता जा रहा है। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में आई भारी गिरावट ने यूरोप पर आर्थिक दबाव और बढ़ा दिया है। रिक्टर के अनुसार, यूरोप के सामने फिलहाल कोई ठोस समाधान नहीं दिख रहा है और हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं।
मध्य पूर्व युद्ध का असर: मैगी नूडल्स से लेकर कारों तक पर पड़ा संकट
रिक्टर ने मध्य पूर्व युद्ध को वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ा तत्काल खतरा बताया। उन्होंने कहा कि इस युद्ध ने सप्लाई चेन को पूरी तरह बाधित कर दिया है। पैकेजिंग सामग्री की भारी कमी हो गई है। भारत में इसका असर साफ दिख रहा है। नेस्ले इंडिया को पैकेजिंग मटीरियल नहीं मिल पा रहा है। इसके चलते मैगी नूडल्स की फैक्ट्रियों में स्टॉक जमा हो गया है, लेकिन डिस्पैच नहीं हो पा रहा है। इंस्टेंट नूडल्स, जूस, दूध के पैकेट, पेय पदार्थ और कारों के पुर्जों तक के दाम बढ़ गए हैं। रिक्टर ने चेतावनी दी कि यह संकट जल्द ही खत्म होता नहीं दिख रहा है।
भारत: वैश्विक अर्थव्यवस्था का नया इंजन और निवेशकों की पहली पसंद
सभी चुनौतियों के बीच रिक्टर ने भारत को लेकर काफी आशावादी रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि भारत आज वैश्विक अर्थव्यवस्था का एक नया इंजन बनकर उभर रहा है। भारत का विकास अब सिर्फ आईटी और एआई तक सीमित नहीं है। वह तेजी से मैन्युफैक्चरिंग, कृषि और अन्य क्षेत्रों में विस्तार कर रहा है। रिक्टर ने कहा, “मोदी सरकार में लालफीताशाही और भ्रष्टाचार न्यूनतम स्तर पर आ गया है।” उन्होंने भारत को विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) के लिए बेहद आकर्षक गंतव्य बताया। उनके अनुसार, भारत को संरक्षणवाद से बचना चाहिए और अधिक से अधिक निवेश को आकर्षित करना चाहिए।
भारत में स्टार्टअप्स का उभार और विनिर्माण क्षेत्र की तरक्की
रिक्टर ने भारत में स्टार्टअप्स के तेजी से बढ़ते इकोसिस्टम की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि स्टार्टअप्स नए विचारों, तकनीक और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा दे रहे हैं। भारत Industry 4.0 सुपरपावर बनने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के उस बयान का जिक्र किया जिसमें भारत को ‘एआई सुपरपावर’ बनाने की बात कही गई थी। रिक्टर ने कहा, “मैं भारत को लेकर बहुत आश्वस्त हूं, लेकिन वैश्विक परिदृश्य को लेकर काफी निराशावादी हूं।” उन्होंने स्पष्ट किया कि जहां बाकी दुनिया संकटों से जूझ रही है, वहीं भारत उज्ज्वल स्थान (bright spot) के रूप में उभर रहा है। उन्होंने भारत को नीतिगत स्थिरता बनाए रखने की सलाह दी।
