गंगोत्री हाईवे पर भूस्खलन से बिगड़े हालात: NGT ने BRO को लगाई फटकार, कहा- अब कागजी दावे नहीं, जमीन पर चाहिए काम

Uttarakhand News: चारधाम यात्रा की महत्वपूर्ण जीवनरेखा माने जाने वाले गंगोत्री नेशनल हाईवे (NH-34) पर बार-बार हो रहे भूस्खलन और कछुआ गति से चल रहे मरम्मत कार्यों पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। ट्रिब्यूनल ने सीमा सड़क संगठन (BRO) को स्पष्ट चेतावनी दी है कि उसे अब केवल ‘कागजी दावों’ से संतुष्ट नहीं किया जा सकता। एनजीटी ने दो टूक शब्दों में कहा कि गंगोत्री मार्ग पर अब अस्थायी मरम्मत के बजाय तय समयसीमा के भीतर ठोस और स्थायी समाधान नजर आने चाहिए।

NGT की प्रधान पीठ ने BRO की प्रगति रिपोर्ट को परखा

प्रधान पीठ के न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की खंडपीठ ने इस मामले की गहन समीक्षा की। सुनवाई के दौरान बीआरओ द्वारा प्रस्तुत हलफनामे पर कई सवाल उठाए गए। बीआरओ ने दावा किया है कि बरेठी, नालूपानी, जसकोट और गोजमर जैसे सबसे संवेदनशील ‘लैंडslide जोन’ अब उसके सीधे नियंत्रण में हैं। हालांकि, ट्रिब्यूनल ने इस बात पर नाराजगी जताई कि लंबे समय से इन क्षेत्रों में यात्री और स्थानीय लोग भारी जोखिम के बीच सफर करने को मजबूर हैं।

113 करोड़ का मास्टर प्लान: एक साल में काम पूरा करने का वादा

बीआरओ ने एनजीटी को सूचित किया कि भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों के स्थायी उपचार के लिए 113.12 करोड़ रुपये की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) को मंजूरी मिल चुकी है। इस योजना के तहत ढलान स्थिरीकरण और पर्यावरणीय पुनर्स्थापन का व्यापक खाका तैयार किया गया है। एजेंसी ने वादा किया है कि टेंडर प्रक्रिया पूरी होते ही ठेका मिलने के एक साल के भीतर सभी कार्य पूरे कर लिए जाएंगे। एनजीटी ने साफ किया कि इस समयसीमा में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

जैव-इंजीनियरिंग और इको-फ्रेंडली तकनीकों पर जोर

पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए इस बार केवल कंक्रीट की दीवारों पर निर्भरता कम की गई है। नई डीपीआर में जियो-जूट, लेमन ग्रास और वेटिवर जैसी जैव-इंजीनियरिंग तकनीकों को शामिल किया गया है। ये तकनीकें पहाड़ों की ढलानों को प्राकृतिक तरीके से मजबूती प्रदान करेंगी और मिट्टी के कटाव को रोकेंगी। साथ ही, निर्माण कार्य के कारण हुए नुकसान की भरपाई के लिए बड़े स्तर पर प्रतिपूरक पौधरोपण (Compensatory Afforestation) को भी योजना का अनिवार्य हिस्सा बनाया गया है।

‘सिंगल प्वाइंट रिस्पॉन्सिबिलिटी’ से बढ़ेगी जवाबदेही

बीआरओ ने ट्रिब्यूनल को भरोसा दिलाया है कि अब हाईवे के सभी हिस्सों की जिम्मेदारी उसी के पास है। ‘सिंगल प्वाइंट रिस्पॉन्सिबिलिटी’ लागू होने से अब देरी होने पर अलग-अलग एजेंसियों पर ठीकरा फोड़ने की गुंजाइश खत्म हो गई है। एनजीटी ने स्पष्ट कर दिया है कि मेंटेनेंस फंड से किए जाने वाले अंतरिम कार्य केवल अस्थायी राहत हैं और इन्हें स्थायी समाधान का विकल्प नहीं माना जा सकता। सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करना अब पूरी तरह बीआरओ की जवाबदेही होगी।

20 जुलाई को अगली परीक्षा, चार सप्ताह में देनी होगी रिपोर्ट

एनजीटी ने बीआरओ को अगले चार सप्ताह के भीतर पर्यावरणीय उपायों और पौधरोपण की विस्तृत प्रगति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। याचिकाकर्ता को भी इस पर अपना जवाब देने का समय दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई को निर्धारित की गई है, जिसमें बीआरओ द्वारा जमीन पर किए गए कार्यों की असली परीक्षा होगी। चारधाम यात्रा के सुचारू संचालन के लिए गंगोत्री हाईवे का सुरक्षित होना अनिवार्य है, जिस पर अब सर्वोच्च पर्यावरणीय संस्था की पैनी नजर है।

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