Himachal News: हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां स्वास्थ्य विभाग ने एक जिंदा बुजुर्ग महिला को सरकारी दस्तावेजों में मृत घोषित कर दिया। इस बड़ी लापरवाही के कारण बीमार महिला की सहारा पेंशन अचानक बंद हो गई। महिला एम्स बिलासपुर में अपना गंभीर इलाज करवा रही है। मामला मीडिया में आने के बाद विभाग में हड़कंप मच गया। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने अपनी इस बड़ी गलती को तुरंत सुधारा है।
गंभीर बीमारी से जूझ रही है बुजुर्ग महिला
कचौरी पंचायत के साई ब्राह्मणा गांव की रहने वाली चौंसठ वर्षीय शीला देवी गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं। उनके पति बलदेव राज ने बताया कि महिला के दिमाग की नस पूरी तरह ब्लॉक है। इस वजह से वह न बोल पाती हैं और न ही खुद उठ सकती हैं। उनका इलाज पहले शिमला के आईजीएमसी और चंडीगढ़ के पीजीआई में चला था। अब एम्स बिलासपुर के डॉक्टरों की देखरेख में उनका घर पर ही इलाज चल रहा है।
ई-केवाईसी के दौरान खुला लापरवाही का राज
बुजुर्ग महिला को सरकार से हर महीने सहारा पेंशन मिलती थी। कुछ समय पहले यह पेंशन अचानक खाते में आना बंद हो गई। दिसंबर दो हजार पच्चीस में जब महिला की ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी नहीं हुई, तो उन्हें लोकमित्र केंद्र भेजा गया। वहां भी इस समस्या का कोई समाधान नहीं निकल सका। इसके बाद बलदेव राज मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय पहुंचे। वहां पता चला कि स्वास्थ्य विभाग ने छह महीने पहले ही उनकी पत्नी को मृत घोषित कर दिया था।
कार्यालय के चक्कर काटने के बाद सुधरी गलती
बलदेव राज ने फरवरी दो हजार छब्बीस में विभाग को दस्तावेज देकर लिखित शिकायत दी थी। कई महीने बीत जाने के बाद भी विभाग ने इस गलती को ठीक नहीं किया। एक तरफ पत्नी के महंगे इलाज का भारी खर्च था। दूसरी तरफ पेंशन रुकने से उनकी आर्थिक स्थिति और खराब हो गई। मीडिया में खबर आने पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. शशि दत्त शर्मा ने बताया कि तकनीकी खामी दूर करके पेंशन तुरंत बहाल कर दी गई है।
