Himachal Pradesh: हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने किन्नौर जिले का अहम दौरा किया है। उन्होंने सतलुज नदी पर बन रहे 450 मेगावाट के शोंगटोंग-करछम प्रोजेक्ट का बारीकी से निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री ने निर्माण की धीमी गति पर संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मेगा प्रोजेक्ट का पहला चरण जनवरी 2027 तक पूरा होना चाहिए। यह परियोजना राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
प्रोजेक्ट साइट पर मुख्यमंत्री का सख्त रुख और निरीक्षण
अपने दो दिवसीय किन्नौर दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने सीधे पावरहाउस, सर्ज शाफ्ट और बैराज क्षेत्रों का दौरा किया। उन्होंने वहां मौजूद इंजीनियरों और अन्य कर्मचारियों से निर्माण कार्य को लेकर सीधी बातचीत की। मुख्यमंत्री सुक्खू ने अधिकारियों को निर्माण कार्यों में तेजी लाने का कड़ा निर्देश दिया है। राज्य सरकार इस पूरे प्रोजेक्ट को इसी वित्तीय वर्ष के अंत तक पूरा करना चाहती है। सरकार स्वच्छ ऊर्जा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।
हिमाचल की ऊर्जा आत्मनिर्भरता और 75 प्रतिशत काम पूरा
मुख्यमंत्री ने बताया कि यह प्रोजेक्ट राज्य की बिजली उत्पादन क्षमता को काफी बढ़ा देगा। इससे ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता आएगी और पर्यावरण के अनुकूल सतत विकास को बढ़ावा मिलेगा। कई कठिन चुनौतियों के बावजूद सरकार ने बेहतर योजना के जरिए सक्रिय हस्तक्षेप किया है। निर्माण की गति बनाए रखने के लिए लगातार तकनीकी उपाय अपनाए जा रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार अब तक इस अहम हाइड्रो प्रोजेक्ट का लगभग 75 प्रतिशत काम सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है।
हर साल 900 करोड़ की कमाई और ग्रिड की मजबूती
प्रोजेक्ट के प्रमुख हिस्से जैसे बैराज, टनल और पावरहाउस का निर्माण अंतिम चरण में है। इलेक्ट्रो-मैकेनिकल कार्य भी तय कार्यक्रम के अनुसार तेजी से चल रहे हैं। निर्माण पूरा होने पर यहां से हर साल लगभग 1579 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन होगा। इससे राज्य का पावर ग्रिड बहुत मजबूत होगा। इस बड़े प्रोजेक्ट से हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था में सालाना लगभग 900 करोड़ रुपये का भारी आर्थिक योगदान मिलेगा। मौके पर कई बड़े अधिकारी मौजूद थे।
