Himachal News: देवभूमि हिमाचल प्रदेश में मई की गर्मी के बीच कुदरत ने रौद्र रूप धारण कर लिया है। रविवार आधी रात के बाद राज्य के कई जिलों में भारी बारिश और 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चले अंधड़ ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया। शिमला, हमीरपुर और कांगड़ा समेत कई इलाकों में बिजली गुल होने से ब्लैकआउट की स्थिति बनी रही। मौसम विभाग ने अब 15 मई तक भारी ओलावृष्टि और आंधी का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।
तूफान की तीव्रता इतनी अधिक थी कि बिलासपुर और सुंदरनगर में कई पेड़ जड़ से उखड़ गए। सड़कों पर टहनियां गिरने से यातायात बाधित हुआ और बिजली की लाइनें क्षतिग्रस्त हो गईं। हालांकि, राहत की बात यह है कि फिलहाल किसी जान-माल के नुकसान की खबर नहीं मिली है। राजधानी शिमला और मनाली जैसे ऊंचे क्षेत्रों में हल्की बर्फबारी भी हुई है। इस बेमौसमी ठंड के कारण पर्यटक मई के महीने में भी भारी ऊनी कपड़े पहनने को मजबूर हैं।
आसमान से बरसी आफत: किसानों और बागवानों की बढ़ी मुसीबत
बेमौसमी बारिश और ओलावृष्टि ने हिमाचल के किसानों और बागवानों की कमर तोड़ दी है। शिमला, कुल्लू और मंडी के ऊपरी इलाकों में सेब की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। निचले इलाकों में गेहूं की कटाई का काम पूरी तरह रुक गया है। खेतों में कटी हुई फसल भीगने से किसानों को आर्थिक नुकसान का डर सता रहा है। सरकार और प्रशासन अब नुकसान का आकलन करने की तैयारी कर रहे हैं ताकि प्रभावितों को राहत दी जा सके।
मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार, बीते 24 घंटों में गुलेर और पंडोह में सर्वाधिक 41 मिमी बारिश हुई। कांगड़ा और सराहन में भी भारी मेघ बरसे हैं। इस बारिश से तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है। केलांग का न्यूनतम तापमान गिरकर 4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। वहीं धर्मशाला और मनाली में भी पारा सामान्य से नीचे चल रहा है। मैदानी इलाकों के लोगों को भीषण गर्मी से तो राहत मिली है, लेकिन किसानों के लिए यह अमृत नहीं बल्कि जहर साबित हो रहा है।
अगले 5 दिनों के लिए ‘येलो और ऑरेंज अलर्ट’ जारी
मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि 15 मई तक राज्य में मौसम के तेवर कड़े रहेंगे। 11 और 12 मई को तेज अंधड़ और बिजली गिरने की प्रबल संभावना है। प्रशासन ने पर्यटकों और स्थानीय लोगों को ऊंचे पहाड़ों पर न जाने की सलाह दी है। खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने के लिए भी अलर्ट जारी किया गया है। विभाग का अनुमान है कि 17 मई तक रुक-रुक कर बारिश का दौर जारी रह सकता है।
विद्युत विभाग की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति बहाल करने के लिए युद्धस्तर पर काम कर रही हैं। कई ग्रामीण इलाकों में अब भी संचार और बिजली सेवाएं बाधित हैं। मौसम के इस बदलते मिजाज ने यह साबित कर दिया है कि जलवायु परिवर्तन का असर अब हिमालयी राज्यों पर गहरा होता जा रहा है। मई में हीटवेव की जगह बर्फबारी और भारी बारिश ने वैज्ञानिकों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है। आने वाले दिन हिमाचल के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।


