Himachal News: हिमाचल प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में इलाज कराने वाले मरीजों के लिए बुरी खबर है। राज्य के अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी चल रही है। सरकार ने इस समस्या को दूर करने के लिए भर्तियां शुरू की थीं। लेकिन अब चुनाव आचार संहिता के कारण इस पूरी भर्ती प्रक्रिया पर ब्रेक लग गया है। मरीजों को इलाज के लिए लंबा इंतजार करना पड़ेगा। स्वास्थ्य विभाग अब चुनाव आयोग से भर्ती के लिए विशेष मंजूरी मिलने की पूरी उम्मीद कर रहा है।
चार मेडिकल कॉलेजों में होनी है 54 डॉक्टरों की तैनाती
राज्य सरकार ने चार प्रमुख मेडिकल कॉलेजों में चिकित्सा व्यवस्था सुधारने का फैसला लिया था। इनमें नाहन, नेरचौक मंडी, हमीरपुर और चंबा के सरकारी मेडिकल कॉलेज शामिल हैं। स्वास्थ्य विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार इन कॉलेजों में 54 स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की सख्त जरूरत है। सरकार ने इन खाली पदों पर सेवानिवृत्त प्रोफेसरों को नियुक्त करने की योजना बनाई है। यह पूरी भर्ती प्रक्रिया राज्य लोक सेवा आयोग के माध्यम से पूरी की जानी है। आचार संहिता सबसे बड़ी बाधा है।
मरीजों के साथ छात्रों की पढ़ाई पर पड़ रहा बुरा असर
अस्पतालों में कई महत्वपूर्ण विभागों के पद लंबे समय से खाली पड़े हुए हैं। इससे सुपर स्पेशलिटी और क्लीनिकल विषयों की स्वास्थ्य सेवाएं सबसे ज्यादा प्रभावित हो रही हैं। मरीजों को अपना उचित इलाज करवाने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। केवल मरीज ही नहीं, बल्कि मेडिकल छात्रों की पढ़ाई का भी भारी नुकसान हो रहा है। विशेषज्ञ शिक्षकों की कमी से छात्रों का भविष्य खतरे में है। इन पदों को भरना अब बेहद जरूरी हो गया है।
अनुबंध पर होनी है भर्ती, चुनाव आयोग की अनुमति का इंतजार
राज्य सरकार ने इस गंभीर समस्या का एक त्वरित समाधान निकाला था। अनुभवी और सेवानिवृत्त डॉक्टरों को अनुबंध के आधार पर तुरंत नियुक्त करने का फैसला हुआ था। इससे अस्पतालों में खाली पदों को तुरंत भरा जा सकता था। इससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में भी बड़ा सुधार देखने को मिलता। लेकिन अब नई भर्तियों के लिए चुनाव आयोग की सख्त अनुमति लेना अनिवार्य हो गया है। सरकार और आम जनता दोनों को आयोग के फैसले का बेसब्री से इंतजार है।


