CNLU पटना में शुरू हुआ साइबर सिक्योरिटी का खास कोर्स: 21 से ज्यादा करियर ऑप्शन और हाई-टेक लैब, जानें कैसे मिलेगा एडमिशन

Patna News: बिहार के प्रतिष्ठित चाणक्य राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (CNLU) ने बदलते दौर की जरूरतों को देखते हुए एक बड़ा कदम उठाया है। विश्वविद्यालय इसी शैक्षणिक सत्र 2026-28 से ‘एमएससी इन साइबर सुरक्षा और डिजिटल फॉरेंसिक’ (M.Sc. in Cybersecurity and Digital Forensics) कोर्स शुरू करने जा रहा है। साइबर अपराधों के बढ़ते ग्राफ और इस क्षेत्र में विशेषज्ञों की भारी कमी को देखते हुए यह कोर्स छात्रों के लिए रोजगार के अपार अवसर लेकर आया है। कुलपति प्रो. फैजान मुस्तफा ने बताया कि इसके लिए कैंपस में 60 सीटों वाली अत्याधुनिक डिजिटल फॉरेंसिक लैब भी तैयार कर ली गई है।

एडमिशन के लिए योग्यता और महत्वपूर्ण तिथियां

इस दो वर्षीय पोस्ट ग्रेजुएट प्रोग्राम में किसी भी विषय से स्नातक (Graduation) करने वाले छात्र आवेदन कर सकते हैं। सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम 55 प्रतिशत और एससी/एसटी वर्ग के लिए 50 प्रतिशत अंक अनिवार्य हैं। कुल 60 सीटों पर नामांकन के लिए प्रवेश परीक्षा 13 जून 2026 को ऑफलाइन मोड में आयोजित की जाएगी। इच्छुक छात्र विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट cnlu.ac.in पर जाकर 7 जून तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

चयन प्रक्रिया: लिखित परीक्षा के साथ इंटरव्यू भी

सीएनएलयू में दाखिला पाना इतना आसान नहीं होगा। नामांकन के लिए छात्रों को एक कठिन चयन प्रक्रिया से गुजरना होगा। इसमें 50 अंकों की लिखित परीक्षा शामिल है, जिसके बाद साक्षात्कार (Interview) और समूह चर्चा (Group Discussion) का आयोजन किया जाएगा। विश्वविद्यालय का लक्ष्य केवल उन्हीं छात्रों को चुनना है जो तकनीकी रूप से सक्षम होने के साथ-साथ तार्किक क्षमता भी रखते हों। यह पाठ्यक्रम विश्वविद्यालय के साइबर सुरक्षा एवं डिजिटल फॉरेंसिक केंद्र के माध्यम से चलाया जाएगा।

STPI और बिहार पुलिस के साथ हुआ खास करार

इस कोर्स की सबसे बड़ी खासियत इसके राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के समझौते (MoUs) हैं। सीएनएलयू ने छात्रों को व्यावहारिक अनुभव दिलाने के लिए सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क ऑफ इंडिया (STPI), डेटा सिक्योरिटी काउंसिल ऑफ इंडिया (DSCI), पालो ऑल्टो नेटवर्क्स और बिहार पुलिस के साथ हाथ मिलाया है। इसके अलावा नामी कंपनी प्राइसवाटर हाउसकूपर्स (PwC) के विशेषज्ञ भी छात्रों को ट्रेनिंग देंगे। इन साझेदारियों से छात्रों को रियल-टाइम साइबर खतरों से निपटने का सीधा अनुभव मिलेगा।

पाठ्यक्रम में शामिल होंगे ये आधुनिक विषय

विश्वविद्यालय ने इस कोर्स के सिलेबस को काफी आधुनिक रखा है। इसमें साइबर कानून, कंप्यूटर नेटवर्किंग और एआई (AI) फ्रेमवर्क के साथ-साथ डिजिटल साक्ष्य विश्लेषण, मैलवेयर विश्लेषण, नेटवर्क सुरक्षा और क्लाउड सुरक्षा जैसे विषय पढ़ाए जाएंगे। छात्रों को डेटा संरक्षण कानून और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) सुरक्षा की भी गहरी जानकारी दी जाएगी। खास बात यह है कि यदि कोई छात्र एक साल बाद कोर्स छोड़ना चाहता है, तो उसे ‘एडवांस्ड डिप्लोमा’ की डिग्री दी जाएगी, जबकि दो साल पूरे करने पर एमएससी की उपाधि मिलेगी।

21 से ज्यादा करियर विकल्प और हाई सैलरी की उम्मीद

कुलसचिव प्रो. एसपी सिंह के अनुसार, इस कोर्स को पूरा करने के बाद छात्रों के पास करियर के 21 से अधिक रास्ते खुलेंगे। छात्र उद्योग, न्यायपालिका, विधिक प्रणाली, कानून प्रवर्तन एजेंसियों और राष्ट्रीय सुरक्षा संस्थानों में बड़े पदों पर काम कर सकेंगे। वर्तमान में साइबर एक्सपर्ट्स की मांग बैंकिंग, आईटी और सरकारी खुफिया विभागों में सबसे अधिक है, जहां शुरुआती पैकेज भी काफी आकर्षक होता है।

अगले सत्र से ‘मैनेजमेंट लॉ’ की भी होगी शुरुआत

कुलपति प्रो. फैजान मुस्तफा ने एक और महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए बताया कि अगले सत्र से सीएनएलयू में ‘मैनेजमेंट इन लॉ’ की पढ़ाई शुरू होगी। देश में बहुत कम संस्थानों में यह कोर्स उपलब्ध है। अदालतों में लंबित मामलों के बेहतर प्रबंधन के लिए ऐसे विशेषज्ञों की जरूरत है जो कानूनी ज्ञान के साथ-साथ डेटाबेस मैनेजमेंट में भी कुशल हों। इसके साथ ही, विश्वविद्यालय जल्द ही बिहार पुलिस को साइबर सुरक्षा की विशेष ट्रेनिंग देकर उन्हें तकनीकी रूप से और अधिक दक्ष बनाएगा।

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