Washington News: अमेरिका और ईरान के बीच अचानक हुए युद्धविराम ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। इस शांति समझौते के पीछे चीन की एक बहुत बड़ी कूटनीतिक भूमिका सामने आई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सख्त धमकियों के बाद ईरान भारी दबाव में था। ऐसे नाजुक समय में चीन ने गुप्त रूप से हस्तक्षेप किया। उसने ईरान को पीछे हटने के लिए पूरी तरह राजी कर लिया। इस अहम समझौते के तहत अब ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने पर सहमत हो गया है।
चीन ने कैसे किया ईरान को युद्ध टालने पर मजबूर?
अंतरराष्ट्रीय राजनीति में चीन ने एक बहुत बड़ा और अहम दांव खेला है। चीन अपनी अर्थव्यवस्था के लिए मध्य पूर्व के कच्चे तेल पर ज्यादा निर्भर है। अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध से वैश्विक तेल आपूर्ति पूरी तरह ठप हो जाती। इसलिए चीनी अधिकारियों ने तेहरान के शीर्ष नेतृत्व से तुरंत संपर्क साधा। उन्होंने ईरान को अमेरिकी सेना की भारी ताकत का एहसास कराया। चीन ने ईरान को कड़े आर्थिक नुकसान की चेतावनी देकर इस युद्धविराम के लिए अंततः मजबूर कर दिया।
होर्मुज जलडमरूमध्य खुलने से दुनिया को मिली बड़ी राहत
इस कूटनीतिक समझौते की सबसे बड़ी शर्त होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल व्यापार के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण रास्ता है। दुनिया का लगभग बीस प्रतिशत कच्चा तेल इसी संकरे समुद्री रास्ते से होकर गुजरता है। ईरान ने युद्ध की आशंका के चलते इस मार्ग को पूरी तरह से बंद कर दिया था। अब इसके दोबारा खुलने से वैश्विक शेयर बाजार और कच्चे तेल की कीमतों में भारी स्थिरता आने की पूरी उम्मीद है।
डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका की बड़ी कूटनीतिक जीत का किया दावा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस समझौते को अपनी बहुत बड़ी कूटनीतिक जीत बताया है। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि उनके सख्त रुख के कारण ही ईरान घुटने टेकने पर मजबूर हुआ। अमेरिका ने बिना मिसाइल दागे अपने सभी मुख्य कूटनीतिक लक्ष्य पूरी तरह हासिल कर लिए हैं। कई अंतरराष्ट्रीय रक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि अमेरिका ने बिना युद्ध लड़े अपना दबदबा कायम किया है। इस शांति समझौते ने मध्य पूर्व में अमेरिकी दबदबे को और ज्यादा मजबूत कर दिया है।


