World News: पाकिस्तान की जर्जर अर्थव्यवस्था को उसके करीबी दोस्त संयुक्त अरब अमीरात ने एक करारा झटका दिया है। यूएई ने पाकिस्तान को दिए गए तीन अरब डॉलर के कर्ज को आगे बढ़ाने से साफ इनकार कर दिया है। इस बड़े फैसले ने इस्लामाबाद की मुश्किलें काफी बढ़ा दी हैं। कर्ज चुकाने के भारी दबाव के बीच पाकिस्तानी नेता अजीबोगरीब बयान दे रहे हैं। आर्थिक संकट में फंसा पाकिस्तान अब पैसे चुकाने के बजाय यूएई का ही खुलेआम मजाक उड़ा रहा है।
पाकिस्तानी सीनेटर का यूएई पर विवादित बयान
पाकिस्तान के दिग्गज सीनेटर मुशाहिद हुसैन ने कर्ज वापसी की मांग पर एक बेहद विवादित बयान दिया है। उन्होंने एक टीवी इंटरव्यू में यूएई को ही लाचार और मजबूर देश बता दिया। हुसैन ने दावा किया कि यूएई को फिलहाल पैसों की सख्त जरूरत है। उन्होंने कहा कि अबू धाबी ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से कुछ बड़े वादे किए हैं। सीनेटर ने यहां तक कह दिया कि पाकिस्तान जरूरत पड़ने पर बड़े भाई की तरह यूएई की मदद करेगा।
अरबों डॉलर की मदद के बाद मिला धोखा
यूएई ने दशकों तक पाकिस्तान को भारी आर्थिक मदद और कर्ज मुहैया कराया है। साल 2023 में ही यूएई ने एक अरब डॉलर का नया कर्ज देने का बड़ा वादा किया था। इसके अलावा दो अरब डॉलर की जमा राशि बढ़ाने पर भी सहमति बनी थी। दोनों देशों के बीच पांच अरब डॉलर के ऑयल रिफाइनरी प्रोजेक्ट की योजना बनी थी। साल 2024 में भी एक बड़ा समझौता हुआ। एडी पोर्ट्स ग्रुप ने कराची बंदरगाह के संचालन का जिम्मा लिया था।
विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ेगा भारी असर
यूएई ने सात सालों में पहली बार कर्ज रोलओवर करने से मना किया है। पाकिस्तान इस समय गंभीर आर्थिक दबाव और महंगाई से जूझ रहा है। यह तीन अरब डॉलर इस्लामाबाद के लिए बहुत मायने रखते हैं। यह रकम पाकिस्तान के कुल विदेशी मुद्रा भंडार का अठारह प्रतिशत हिस्सा है। मार्च तक पाकिस्तान का मुद्रा भंडार केवल 16.4 अरब डॉलर दर्ज किया गया था। यह सीमित खजाना देश के सिर्फ तीन महीने के आयात के लिए ही काफी है।
कर्ज के मामले में भारत को घसीटा
कर्ज लौटाने का रास्ता खोजने के बजाय पाकिस्तानी नेता अब भारत को बीच में ला रहे हैं। मुशाहिद हुसैन ने भारत और यूएई के मजबूत रिश्तों पर अपनी झुंझलाहट निकाली है। उन्होंने यूएई को भारत से सावधान रहने की बेतुकी चेतावनी दे डाली। हुसैन ने कहा कि यूएई की एक करोड़ आबादी में करीब तैंतालीस लाख भारतीय रहते हैं। पाकिस्तानी सीनेटर ने मनगढ़ंत अखंड भारत एजेंडे का डर दिखाकर यूएई को डराने की एक नाकाम कोशिश की है।
आईएमएफ के सामने गिड़गिड़ाता है पाकिस्तान
पाकिस्तान सरकार के अलग बयानों से उसकी बौखलाहट साफ नजर आ रही है। एक तरफ देश के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से कर्ज मांगते हैं। शरीफ खुद मानते हैं कि कर्ज लेने के लिए उन्हें दुनिया के सामने सिर झुकाना पड़ता है। वहीं दूसरी तरफ उनके सांसद यूएई जैसे मददगार देश को आंखें दिखा रहे हैं। विशेषज्ञ इस पूरे घटनाक्रम को पाकिस्तान की कूटनीतिक विफलता और आर्थिक कंगाली की हताशा के रूप में साफ तौर पर देख रहे हैं।

