ईरान युद्ध से मंडराया बड़ा खतरा! क्या गैस-तेल संकट में भारत का ‘पुराना दोस्त’ बनेगा तारणहार?

New Delhi News: मध्य पूर्व में सुलगती जंग ने पूरी दुनिया को गहरी चिंता में डाल दिया है। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव से वैश्विक ईंधन संकट तेजी से गहरा रहा है। ऐसे मुश्किल वक्त में भारत का पुराना दोस्त रूस मदद के लिए आगे आया है। रूस ने भारत को ज्यादा तेल और प्राकृतिक गैस देने का बड़ा प्रस्ताव दिया है। रूसी उप-प्रधानमंत्री डेनिस मांतुरोव ने खुद भारत आकर इस सहयोग का भरोसा दिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर से बहुत खास मुलाकात की है। दोनों देशों ने ऊर्जा सुरक्षा और फर्टिलाइजर सप्लाई जैसे अहम मुद्दों पर गंभीर बातचीत की है।

संकट की घड़ी में रूस का बड़ा प्रस्ताव

दुनिया के अहम समुद्री व्यापारिक रास्ते होर्मुज जलडमरूमध्य पर जंग का भारी खतरा मंडरा रहा है। यह समुद्री रास्ता अब प्रभावी रूप से बंद होने के कगार पर पहुंच चुका है। इसी रास्ते से दुनिया का सबसे ज्यादा तेल और गैस व्यापार होता है। भारत अपनी जरूरत का करीब नब्बे फीसदी ईंधन इसी होर्मुज जलडमरूमध्य से मंगाता है। इस रास्ते पर जहाजों के फंसने से भारत में ईंधन की किल्लत का डर है। इसी बीच रूसी दूतावास ने भारत को राहत देने वाला एक बड़ा बयान जारी किया है। रूसी कंपनियों ने भारत को तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस की सप्लाई बढ़ाने का वादा किया है।

पीएम मोदी और मांतुरोव की अहम बातचीत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस मुलाकात की अहम जानकारी दी। उन्होंने बताया कि रूसी उप-प्रधानमंत्री के साथ कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने व्यापार, कनेक्टिविटी और आपसी सहयोग को बढ़ाने पर पूरा जोर दिया। पीएम मोदी ने पिछले साल राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ हुए समझौते को याद किया। उन्होंने दोनों देशों के बीच मजबूत होते रिश्तों और लगातार प्रयासों की जमकर तारीफ की। रूसी नेता मांतुरोव ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल से भी खास मुलाकात की है। इस दौरान सभी नेताओं ने पश्चिम एशिया के युद्ध हालात पर बहुत लंबी चर्चा की।

भारत ने मजबूत किया नया ऊर्जा विकल्प

रूस ने साल 2025 तक भारत को खनिज उर्वरकों की सप्लाई चालीस फीसदी बढ़ा दी है। इसके अलावा दोनों देश मिलकर कार्बाइड उत्पादन का एक नया प्रोजेक्ट भी तैयार कर रहे हैं। जंग शुरू होने के बाद से भारत लगातार अपने ईंधन के नए स्रोत तलाश रहा है। अमेरिका के कड़े प्रतिबंधों के बावजूद भारत ने रूस से कच्चा तेल खरीदना जारी रखा। हाल ही में अमेरिका ने रूसी तेल पर लगे कुछ प्रतिबंधों में थोड़ी ढील दी है। इसके बाद रूस एक बार फिर दुनिया का सबसे बड़ा ऊर्जा सप्लायर बनकर उभरा है। अब भारत अपनी जरूरत पूरी करने के लिए वेनेजुएला समेत अन्य देशों से तेल खरीद रहा है।

SOURCE: न्यूज़ एजेंसियां
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