International News: दुनिया भर के वैज्ञानिकों ने धरती के अंदर सोना बनने का सबसे बड़ा रहस्य सुलझा लिया है। जर्मनी के जियोमार हेल्महोल्ट्ज सेंटर के शोधकर्ताओं ने यह ऐतिहासिक स्टडी की है। डॉ. क्रिश्चियन टिम्म की टीम ने दक्षिण प्रशांत महासागर की गहराई में एक ‘गोल्ड फैक्ट्री’ का पता लगाया है। केरमाडेक द्वीप के नीचे सोना कैसे बनता है, यह स्पष्ट है। यह अहम खोज पूरी दुनिया के लिए भविष्य में कई नए रास्ते खोलेगी।
समुद्र की गहराई में कैसे पकता है सोना?
वैज्ञानिकों ने पाया कि महासागर के नीचे ज्वालामुखी द्वीप एक सोने के कारखाने की तरह काम करते हैं। यहाँ हाइड्रस यानी पानी से भरा मेंटल कई बार पिघलता है। इसी पिघलने की प्रक्रिया के दौरान मैग्मा में सोने की मात्रा बढ़ती जाती है। डॉ. टिम्म के अनुसार सोना एक बार में नहीं बनता है। मेंटल के बार-बार पिघलने से ही सोना मैग्मा में बहुत अधिक केंद्रित हो पाता है। यह प्रक्रिया समुद्र तल के गहरे अंदर होती है।
ज्वालामुखी ग्लास से खुला सबसे बड़ा राज
इस अहम रिसर्च के लिए वैज्ञानिकों ने समुद्र तल से ज्वालामुखी ग्लास के कुल 66 सैंपल इकट्ठा किए। पानी में लावा के बहुत तेजी से ठंडे होने पर यह खास ग्लास बनता है। इसमें मैग्मा की मूल बनावट पूरी तरह सुरक्षित रहती है। जब वैज्ञानिकों ने इन सैंपल्स की गहराई से जांच की, तो एक चौंकाने वाली बात सामने आई। इन सैंपल्स में आम मिड-ओशन रिज की तुलना में सोने की मात्रा बहुत ज्यादा थी।
समुद्री खनिज संसाधनों की खोज होगी आसान
वैज्ञानिकों की यह नई खोज भविष्य में समुद्री खनिज संसाधनों को खोजने में बहुत मदद करेगी। अब दुनिया भर के भूवैज्ञानिक विशाल समुद्री सल्फाइड डिपॉजिट्स का बहुत आसानी से पता लगा सकेंगे। इन गहरे इलाकों में सोना और दूसरी कीमती धातुएं बड़ी मात्रा में मौजूद हो सकती हैं। डॉ. टिम्म मानते हैं कि यह सोने के जीवन चक्र का पहला कदम भर है। यह कीमती धातु सतह तक पहुंचने से पहले ही अपना काम शुरू कर देती है।

