India News: ईरान और सऊदी अरब के बीच जारी तनाव ने अब एक विनाशकारी मोड़ ले लिया है। अमेरिका और इजराइल की कार्रवाई के जवाब में ईरान ने सऊदी अरब के सबसे महत्वपूर्ण औद्योगिक केंद्र ‘अल जुबैल’ पर जबरदस्त मिसाइल हमला किया है। इस हमले के बाद पूरे औद्योगिक क्षेत्र में भीषण आग लग गई है। अल जुबैल सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। इस हमले ने न केवल खाड़ी देशों बल्कि पूरी दुनिया के तेल बाजार में भारी खलबली मचा दी है।
सऊदी की जीडीपी को लगा तगड़ा झटका
अल जुबैल इंडस्ट्रियल सिटी लगभग एक हजार वर्ग किलोमीटर के विशाल क्षेत्र में फैला हुआ है। यहाँ 150 से भी अधिक बड़े औद्योगिक संयंत्र स्थित हैं जो देश की प्रगति में सहायक हैं। यह क्षेत्र सऊदी अरब की जीडीपी में सात से बारह प्रतिशत तक का बड़ा योगदान देता है। ईरान के इस मिसाइल हमले ने इन महत्वपूर्ण इकाइयों को सीधा निशाना बनाया है। इससे सऊदी अरब की आर्थिक स्थिरता पर बहुत गहरा संकट मंडराने लगा है।
विदेशी निवेश का सबसे बड़ा केंद्र अब खतरे में
यह औद्योगिक शहर अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए भी सबसे पसंदीदा जगह रहा है। सऊदी अरब में होने वाले कुल विदेशी निवेश का लगभग पचास प्रतिशत हिस्सा अकेले इसी शहर में आता है। यहाँ स्टील, एल्युमिनियम, केमिकल और फर्टिलाइज़र इंडस्ट्री के बड़े-बड़े ग्लोबल प्लांट्स मौजूद हैं। मिसाइल हमले के बाद लगी आग ने इन कीमती औद्योगिक ढांचों को भारी नुकसान पहुँचाया है। विदेशी कंपनियों में इस हमले के बाद भारी डर का माहौल पैदा हो गया है।
वैश्विक तेल आपूर्ति पर पड़ सकता है बुरा असर
ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से अल जुबैल का महत्व पूरी दुनिया के लिए बहुत ज्यादा है। यहाँ रोजाना करीब पांच लाख से सात लाख बैरल कच्चे तेल की प्रोसेसिंग की जाती है। इस पूरे सिस्टम को चलाने के लिए यहाँ कई बड़े पावर प्लांट्स भी स्थापित हैं। मिसाइल हमले ने तेल प्रोसेसिंग और ऊर्जा सप्लाई के इस पूरे ढांचे को खतरे में डाल दिया है। अगर यहाँ नुकसान बढ़ता है तो ग्लोबल मार्केट में तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं।
युद्ध की आग में झुलसा खाड़ी का औद्योगिक हब
ईरान का यह पलटवार अब एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध की ओर इशारा कर रहा है। अल जुबैल में लगी आग को बुझाने के लिए सुरक्षा बल और फायर ब्रिगेड की टीमें लगातार जूझ रही हैं। औद्योगिक इकाइयों के पास मौजूद ऊर्जा भंडार इस आग को और भी ज्यादा भड़का रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के विशेषज्ञ इसे वैश्विक सप्लाई चेन के लिए एक बड़ा खतरा मान रहे हैं। अब सबकी नजरें सऊदी अरब और उसके सहयोगियों के अगले कदम पर टिकी हैं।

