World News: भारत को ऊर्जा सुरक्षा का भरोसा देने वाले रूस को बहुत बड़ा झटका लगा है। रूसी उप-प्रधानमंत्री ने भारत को बेरोकटोक तेल आपूर्ति का ठोस वादा किया था। लेकिन अगले दिन यूक्रेन के ड्रोन्स ने रूस के बड़े तेल ठिकानों पर भीषण हमला कर दिया। इन हमलों ने उस्त-लुगा और प्रिमोर्स्क जैसे अहम एक्सपोर्ट हब को पूरी तरह तबाह कर दिया है। इससे कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन भयानक रूप से टूट गई है।
बाल्टिक सागर के अहम तेल ठिकानों पर तबाही
यूक्रेन ने रूसी अर्थव्यवस्था की रीढ़ तोड़ने के लिए इन तेल बंदरगाहों को निशाना बनाया है। उस्त-लुगा और प्रिमोर्स्क पोर्ट भारत समेत कई देशों के लिए काफी अहम माने जाते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक महज दस दिनों के भीतर उस्त-लुगा टर्मिनल पर पांच बड़े ड्रोन हमले हुए हैं। इससे वहां का बुनियादी ढांचा पूरी तरह चरमरा गया और भयंकर आग लग गई। इस भारी तबाही के कारण रूस का डीजल और कच्चे तेल का समुद्री निर्यात ठप हो गया है।
समुद्री रास्ते बंद होने से बढ़ा आर्थिक संकट
हमलों के कारण रूसी रिफाइनरियों के पास कोई सुरक्षित समुद्री रास्ता नहीं बचा है। पहले हर हफ्ते पचास बड़े जहाज बाल्टिक सागर से तेल लेकर निकलते थे। अब फिनलैंड के समुद्री अधिकारियों ने इस रूट पर सन्नाटा पसरने की पुष्टि की है। सैटेलाइट तस्वीरों से स्पष्ट हुआ है कि रूसी टर्मिनलों की भारी क्षमता नष्ट हो चुकी है। इससे मास्को को हर हफ्ते अरबों डॉलर के राजस्व का सीधा नुकसान उठाना पड़ रहा है।
रेल मार्ग के इस्तेमाल में आ रही भारी मुश्किलें
समुद्र का रास्ता बंद होने पर रूस मजबूरन महंगे रेल रूट का सहारा ले रहा है। कंपनियां मालगाड़ियों के जरिए अपना कच्चा तेल छोटे बंदरगाहों तक भेजने का प्रयास कर रही हैं। इसके लिए वायसोत्स्क या ब्लैक सी के तामान पोर्ट का रुख किया जा रहा है। लेकिन हकीकत यह है कि वायसोत्स्क बंदरगाह की क्षमता वर्तमान मांग के सामने काफी कम है। यह सीमित विकल्प रूस की जरूरत के हिसाब से बिल्कुल नाकाफी साबित हो रहा है।
रूस के सामने खड़ी हुई चोक पॉइंट वाली स्थिति
तामान पोर्ट तक तेल पहुंचाने के लिए हजारों नए डिब्बों और भारी खर्च की जरूरत है। चरमराई अर्थव्यवस्था के लिए फिलहाल यह भारी बोझ उठाना लगभग पूरी तरह नामुमकिन लग रहा है। विशेषज्ञ इस हालात को रूस के लिए चोक पॉइंट वाली बेहद गंभीर स्थिति बता रहे हैं। मास्को के पास बेचने के लिए भारी मात्रा में कच्चा तेल तो मौजूद है। लेकिन यूक्रेन के हमलों ने इसे बाजार तक पहुंचाने के सारे रास्ते बंद कर दिए हैं।

