Cuba News: अमेरिका की कड़ी नाकाबंदी के बावजूद एक रूसी तेल टैंकर क्यूबा की सीमा में प्रवेश कर गया है। ‘एनातोली कोलोदकिन’ नामक इस जहाज में करीब 7.3 लाख बैरल कच्चा तेल लदा है। हैरानी की बात यह है कि अमेरिकी कोस्ट गार्ड ने इस जहाज को रोकने की कोई कोशिश नहीं की। खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस पर अपना नरम रुख दिखाया है। रूस के इस कदम को सीधे तौर पर अमेरिका के लिए एक बड़ी कूटनीतिक चुनौती माना जा रहा है।
ट्रंप की नाकाबंदी और पुतिन की संजीवनी
क्यूबा इस समय गंभीर ऊर्जा संकट और ब्लैकआउट का भारी सामना कर रहा है। डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने क्यूबा पर अघोषित तेल नाकाबंदी लगा रखी है। इसका मकसद क्यूबा की सरकार पर भारी आर्थिक और राजनीतिक दबाव बनाना था। लेकिन व्लादिमीर पुतिन ने अपने पुराने साथी को डूबने से बचा लिया है। रूसी जहाज का पहुंचना क्यूबा के लिए किसी बड़ी संजीवनी से कम नहीं है। इससे क्यूबा को अपना ईंधन भंडार भरने के लिए कुछ हफ्तों का वक्त मिल जाएगा।
अमेरिका के सामने रूस का कूटनीतिक खेल
अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ इसे सिर्फ एक तेल की खेप नहीं मान रहे हैं। यह रूस की तरफ से अमेरिका के लिए एक बहुत बड़ा भू-राजनीतिक संदेश है। रूस दिखाना चाहता है कि वह अमेरिका के करीब पहुंचकर भी उसे खुली चुनौती दे सकता है। राष्ट्रपति ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि उन्हें रूसी जहाज के क्यूबा जाने से कोई आपत्ति नहीं है। ट्रंप का यह नया बयान उनके पिछले आक्रामक रवैये से बिल्कुल अलग है। इससे साफ है कि अमेरिका अभी रूस से सीधा टकराव नहीं चाहता है।
यूक्रेन और ईरान तनाव के बीच शक्ति प्रदर्शन
दुनिया में इस समय कई मोर्चों पर तनाव अपने चरम पर है। एक तरफ यूक्रेन में लगातार भयंकर युद्ध चल रहा है। वहीं दूसरी तरफ ईरान और इजरायल के बीच पश्चिमी एशिया में हालात खराब हैं। ऐसे समय में पुतिन ने क्यूबा में तेल भेजकर एक बड़ा मास्टरस्ट्रोक खेला है। रूस ने साबित कर दिया है कि वह पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों से डरने वाला नहीं है। वह अब भी दुनिया भर में अपने सहयोगियों की पूरी मदद कर सकता है। इस घटना से एक नए शीत युद्ध की सुगबुगाहट तेज हो गई है।


