50 साल बाद चांद की ओर इंसान का रोमांचक सफर, ओरियन कैप्सूल ने छोड़ी पृथ्वी की कक्षा! जानें क्या रचेगा नया इतिहास

Washington News: नासा के आर्टेमिस-2 मिशन ने अंतरिक्ष विज्ञान में एक नया इतिहास रच दिया है। ओरियन कैप्सूल पृथ्वी की कक्षा को छोड़कर चांद की तरफ निकल चुका है। लॉन्चिंग के पच्चीस घंटे बाद ट्रांसलूनर इग्निशन की जटिल प्रक्रिया पूरी हुई। अंतरिक्ष यात्री चार लाख किलोमीटर दूर चंद्रमा की तरफ तेजी से बढ़ रहे हैं। यह सफर मानव जाति के लिए एक बहुत बड़ी वैज्ञानिक छलांग है। आधी सदी के बाद इंसान फिर से चंद्रमा के करीब है।

इंजन फायर कर पृथ्वी की कक्षा से बाहर निकला ओरियन

पृथ्वी की कक्षा को छोड़कर चांद की ओर जाने की इस प्रक्रिया को ट्रांसलूनर इंजेक्शन बर्न कहा जाता है। इस दौरान शक्तिशाली इंजन ने कैप्सूल को अड़तीस हजार किलोमीटर प्रति घंटे की जबर्दस्त गति प्रदान की। इसी गति के कारण कैप्सूल पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण से बाहर निकल गया। साल उन्नीस सौ बहत्तर के अपोलो सत्रह मिशन के बाद यह पहला मौका है जब इंसान चांद के इतने करीब जा रहा है। यह नासा का बड़ा कदम है।

चार अंतरिक्ष यात्रियों के साथ ओरियन कैप्सूल का सफर

ओरियन कैप्सूल में चार अनुभवी अंतरिक्ष यात्री सवार होकर चंद्रमा के ऐतिहासिक सफर पर रवाना हुए हैं। इनमें तीन अमेरिकी और एक कनाडाई नागरिक शामिल हैं। नासा के रीड वाइजमैन इस मिशन का हिस्सा हैं। उनके साथ अश्वेत अंतरिक्ष यात्री विक्टर ग्लोवर और महिला यात्री क्रिस्टीना कोच भी हैं। कनाडा से जेरेमी हैंसन इस दल को पूरा करते हैं। यह अनुभवी टीम इस मिशन को सफल बनाने के लिए पूरी तरह तैयार है।

अंतरिक्ष से पृथ्वी का अद्भुत नजारा और मिशन का लक्ष्य

गुरुवार को इन अंतरिक्ष यात्रियों ने हजारों मील की ऊंचाई से पृथ्वी को निहारा। क्रिस्टीना कोच ने मिशन कंट्रोल को उत्साह के साथ अहम जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अंतरिक्ष से महाद्वीप और दक्षिणी ध्रुव बिल्कुल स्पष्ट दिखाई दे रहे थे। इस मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा की सतह पर नहीं उतरेंगे। वे चंद्रमा के बहुत करीब से गुजरेंगे और फिर एक यू-टर्न लेकर वापस धरती की ओर लौट आएंगे। यह परीक्षण उड़ान है।

अपोलो 13 मिशन का पुराना रिकॉर्ड टूटने की उम्मीद

आर्टेमिस मिशन की इस पूरी प्रक्रिया में अंतरिक्ष यात्री एक नया कीर्तिमान स्थापित करेंगे। वे अंतरिक्ष में लगभग चार लाख छह हजार किलोमीटर की अकल्पनीय दूरी तक जाएंगे। यह मानव द्वारा अब तक तय किया गया सबसे लंबा अंतरिक्ष सफर होगा। फिलहाल सबसे अधिक दूरी का पुराना रिकॉर्ड अपोलो तेरह मिशन के नाम दर्ज है। उन्नीस सौ सत्तर में तीन सदस्यीय दल ने लाखों मील की दूरी तय करके यह खास रिकॉर्ड बनाया था।

अंतरिक्ष यात्रियों के लिए एक नया और अद्भुत अनुभव

कनाडाई अंतरिक्ष यात्री जेरेमी हैनसेन ने अपने इस अद्भुत अनुभव को दुनिया के साथ साझा किया है। उन्होंने बताया कि जब वे पृथ्वी से दूर जा रहे थे, तब कैप्सूल की खिड़कियों से नजारा बहुत शानदार था। सभी साथी इस ऐतिहासिक पल का भरपूर आनंद ले रहे थे। मिशन से जुड़े विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच और जेरेमी हैनसेन पहले ही विज्ञान के क्षेत्र में इतिहास के सुनहरे पन्नों में अपना नाम दर्ज करा चुके हैं।

विविधता और समावेश का एक शानदार उदाहरण

आर्टेमिस मिशन कई मायनों में बहुत खास है और यह विविधता का जश्न मनाता है। विक्टर ग्लोवर चंद्रमा की ओर जाने वाले पहले अश्वेत व्यक्ति बनकर एक नई मिसाल पेश कर रहे हैं। वहीं, क्रिस्टीना कोच इस तरह के मिशन पर जाने वाली पहली महिला अंतरिक्ष यात्री बन गई हैं। इसके अलावा, जेरेमी हैनसेन ऐसे पहले व्यक्ति हैं जो अमेरिकी नागरिक न होते हुए भी इस चंद्र अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बने हैं।

चांद पर स्थायी मानव बस्ती बसाने की बड़ी तैयारी

नासा का लक्ष्य सिर्फ चांद का चक्कर लगाना नहीं है बल्कि वहां बसना भी है। साल दो हजार तीस तक चंद्रमा पर स्थायी चौकी बनाने की योजना पर तेजी से काम चल रहा है। इसके लिए अमेरिकी कांग्रेस में एक विशेष विधेयक भी पेश किया गया है। इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य नासा को स्थायी मून बेस स्थापित करने का स्पष्ट निर्देश देना है। कांग्रेस सदस्य कीथ सेल्फ ने यह बड़ा और अहम कदम उठाया।

अंतरिक्ष में अमेरिकी प्रभुत्व को बनाए रखने की चुनौती

प्रस्तावित विधेयक में मौजूदा अमेरिकी अंतरिक्ष कानून में कुछ जरूरी संशोधन का भी प्रावधान रखा गया है। इसके तहत चंद्रमा पर पहली अंतरिक्ष चौकी स्थापित करने के लिए दिसंबर दो हजार तीस की समय सीमा तय की गई है। सांसद कीथ सेल्फ का स्पष्ट मानना है कि अगर अमेरिका अपना दबदबा कायम रखना चाहता है, तो उसे हर हाल में चंद्रमा पर अपनी स्थायी उपस्थिति बहुत जल्द दर्ज करानी ही होगी।

चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर दुनिया की विशेष नजर

इस महत्वपूर्ण विधेयक में नासा प्रशासक को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर जरूरी बुनियादी ढांचा विकसित करने का सीधा निर्देश दिया गया है। यह दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र रणनीतिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस इलाके में मौजूद बर्फ को भविष्य में रॉकेट ईंधन में बदला जा सकता है। इससे गहरे अंतरिक्ष में आगे के मिशन को भेजने में काफी मदद मिलेगी और लागत घटेगी।

हीलिमय-3 और अन्य खनिजों का एक विशाल खजाना

चांद का यह हिस्सा केवल पानी या बर्फ के लिए ही नहीं बल्कि अन्य दुर्लभ खनिजों के लिए भी जाना जाता है। इस क्षेत्र में हीलियम-3 और कई रेयर अर्थ तत्वों का अपार भंडार मौजूद होने की प्रबल संभावना है। कीथ सेल्फ ने इसी वजह से चंद्र अभियान को आर्थिक और रणनीतिक दोनों रूपों से बेहद जरूरी बताया है। उनका मानना है कि चंद्रमा के संसाधन अंतरिक्ष विनिर्माण और भविष्य के खनन को नई गति देंगे।

चीन के साथ अंतरिक्ष में चल रही जोरदार प्रतिस्पर्धा

यह नया अमेरिकी विधेयक ऐसे समय में पेश किया गया है जब चीन के साथ अमेरिका की अंतरिक्ष प्रतिस्पर्धा अपने चरम पर है। चीन के राष्ट्रीय अंतरिक्ष प्रशासन ने भी चंद्रमा पर अपना अनुसंधान स्टेशन स्थापित करने की योजना तैयार कर ली है। सेल्फ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि चंद्रमा के अनछुए संसाधनों पर अंतरराष्ट्रीय कानून फिलहाल अनिश्चित है। जो देश वहां पहले पहुंचेगा, वही आगे के लिए नए नियम बनाएगा।

अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए एक सुनहरा अवसर

चांद पर स्थायी अमेरिकी चौकी बनने से न केवल विज्ञान को फायदा होगा, बल्कि देश को भारी आर्थिक लाभ भी मिलेगा। विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिका के पास अंतरिक्ष की दुनिया में सबसे आगे बढ़ने का यह एक सुनहरा अवसर है। यह विधेयक पहले नासा पुनर्प्राधिकरण अधिनियम के एक हिस्से के रूप में सामने आया था। फरवरी में समिति से पारित होने के बाद अब इसे अलग विधेयक के रूप में पेश किया गया है।

SOURCE: न्यूज़ एजेंसियां
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